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नफॅसुय म्योन छुय होस्तुय, अॅमि  हॅस्त्य्  मोंगनम् गरि गरि बल।  लछि मँज़ सासॅ मॅज़ अखा लोस्तुय, न त हातिनम् साॅरिय तल।। मेरा यह लोभी मन (पेटू) हाथी है। इस हाथी ने हर घड़ी बल मांगा है। इसके चंगुल से हाजारों-लाखों में से एकाध बचा हो तो हो, अन्यथा इसने सबको पददलित कर दिया है।

 

Today is 2nd July Thuresday 2020 : आज:- 2-जुलाई, 2020, गुरूवार है : हार, ज़ून, पछॖ, बाह (देवादेव), ब्रसवार : आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी, वीरवार / गुरुवार / बृहस्पतिवार : Aashaad Mass Shukla Pakash Duadashmiyaam Partamiyaam Triyodashmiyaam Guruvaasra : Month- Aashaad Mass, Pakash- Shukla Pakash Day- Duadeshi, Guruvar : अज़ छु स्वामी गोपी नाथ जियस वॊहरवोद : भगवान गोपी नाथ जयन्ती: हार बाह: लोक भवन यात्रा : श्री सप्तर्षि सम्वत- 5096 : Sapthrishi Samvat - 5096 : Kashmiri Pandit Nirvasan Samvat -31 : काशमीरी पंडित निर्वासन सम्वत -31 : विक्रमी सम्वत-2077 : Gregorian Calendar , ईसवी – 2020 :
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Welcome to kashmiri Bhatta

Kashmiri Pandits have History of over 5000 years

The Kashmiri Pandits (also known as Kashmiri Brahmins)are a Saraswat Brahmin community from the Kashmir Valley,a mountainous region in the Indian state of Jammu and Kashmir. Kashmiri Pandits are the original inhabitants of Kashmir Valley and only remaining Kashmiri Hindu community native to the Kashmir Valley

History of Kashmiri Pandits- How they were saved by Shri Guru Tegh Bahadur Sahib

The foundation of Sikhism was laid by Guru Nanak Dev Ji about 500 years ago. This was the time when people were badly affected by superstitions, rituals, renunciation and hypocrisy. He opposed these & demonstrated their futility by simpler & practical instances from day to day life. His teachings on way of life were (1) NAM JAPNA - Meditation (2) KIRTKARNI-To do one's duty and live truthfully & honestly (3) VAND CHAKNA - To share the fruits of one's labour with others. Read More

सिख पंथ की स्थापना लगभग 540 वर्ष पूर्व, गुरू नानक देव जी द्वारा की गई । उस समय इंसान पूर्ण रूप से कुरीतियों, वहमों व अंधविश्वास से ग्रसित था। गुरू नानक ने इन बातों का विरोध किया व तीन नियमों को जीवन में ढालने पर जोर दिया 1. नाम जपना - ईश्वर का सिमरन करना 2. किरत करनी - जीवन का निर्वाह मेहनत व ईमानदारी से करना 3. वंड छकना - मिल बांट कर खाना । गुरू नानक , हिन्दू व मुस्लिम दोनों के इतने प्रिय थे कि उनके देहान्त के पश्चात , हिन्दुओं ने उनकी याद में समाधी व मुस्लमानों ने मजार बनाई जो आज भी कतारपुर (पाकिस्तान) में एक ही परिसर में बनी हुई है । इस स्थान पर आज भी नमाज पढ़ी जाती है और गुर्बानी कीर्तन होता है। हिंदी में

History of Kashmiri Bhatta
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