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ततः परं ब्रह्मपरं बृहन्तं यथानिकायं सर्वभूतेषु गूढम्। विश्वस्य एक परिवेष्टितारमीशं तं ज्ञात्वा अमृता भवन्ति ॥ 7 ॥            You are the Supreme Brahman, infinite, yet hidden in the hearts of all creatures. You pervade everything. They, who know You, are free from the cycle of birth, death and rebirth. (Svetasvatara 3 : 7)            परमात्मा सब प्रकार से सब काल में मुक्त और शुद्ध है। वह अपरिमित और अनन्त होते हुए भी सभी प्राणियों के हृदय में छिपा हुआ है। परमात्मा को जानने वाले व्यक्ति ही जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।

01.06.2020, ज़्येठॖ (ज्येष्ठ) ज़ूनॖ पछॖ (शुक्ल पक्ष) दऺहम (देवादेव) (दशमी) च़ऺन्दॖरवार (सोमवार) श्री सप्तर्षि सम्वत 5096, Jyesth Maas Shukla Paksh Dashamiyaam Partamiyaam Ekadashmiyaam Somvaasra sanayitaam. Kashmiri Pandit Nirvasan Samvat_ 31 Sapthrishi Samvat _ 5096
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एक दिन चीन के प्रसिद्ध दार्शनिक चुआंगत्सु नदी तटपर बैठे मछलियां पकड़ रहे थे। तभी चुराज्य के दो उच्चअधिकारियों ने  आकर उन्हें संदेश दिया, ‘हमारे राजा आपको अपना प्रधानमंत्राी बनाना चाहते हैं।आपतत्काल राज दरबार चलकर पद ग्रहण करें।’ चुआंगत्सु ने मछली पकड़ना जारी रखा और बिना उनकी ओर देखे बोले, ‘मैंने सुना है कि चुराज्य में एक प्राचीन कछुआ है।वह तीन हजार वर्ष पहले मर गया था, पर उसे सोने की पेटी मे ंराजपरिवार के मंदिर की वेदी पर रखा गया है ।अब बताओ, वह कछुआ क्या पसंद करता-मृतअवस्था मे वेदी पर पूजित होना या जीवित अवस्था में कीचड़ा मे ंदुमहिलाना?’ अधिकारी ने तपाक से उत्तर दिया, ‘जीवित अवस्था मे ंकीचड़ में दुमहिलाना’।
    ‘तो फौरन यहां से भाग जाओ।’ चुआंगत्सु ने उन्हें जाने का इशारा करते हुए कहा, ‘मुझे भी कीचड़ मे ंदुमहिलाना पसंद है।