#

#

ततः परं ब्रह्मपरं बृहन्तं यथानिकायं सर्वभूतेषु गूढम्। विश्वस्य एक परिवेष्टितारमीशं तं ज्ञात्वा अमृता भवन्ति ॥ 7 ॥            You are the Supreme Brahman, infinite, yet hidden in the hearts of all creatures. You pervade everything. They, who know You, are free from the cycle of birth, death and rebirth. (Svetasvatara 3 : 7)            परमात्मा सब प्रकार से सब काल में मुक्त और शुद्ध है। वह अपरिमित और अनन्त होते हुए भी सभी प्राणियों के हृदय में छिपा हुआ है। परमात्मा को जानने वाले व्यक्ति ही जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।

01.06.2020, ज़्येठॖ (ज्येष्ठ) ज़ूनॖ पछॖ (शुक्ल पक्ष) दऺहम (देवादेव) (दशमी) च़ऺन्दॖरवार (सोमवार) श्री सप्तर्षि सम्वत 5096, Jyesth Maas Shukla Paksh Dashamiyaam Partamiyaam Ekadashmiyaam Somvaasra sanayitaam. Kashmiri Pandit Nirvasan Samvat_ 31 Sapthrishi Samvat _ 5096
professional logo

Mahatma Budh ke Anusar महात्मा बुद्ध के अनुसार 4 तरह के होते हैं पुरुष.... आप इनमें से कौन हैं!!

एक बार महात्मा बुद्ध प्रवचन दे रहे थे, जैसे ही उनका प्रवचन समाप्त हुआ जिज्ञासु राजा ने उनसे कहा “हे महात्मा, आपने अपने प्रवचन में चार प्रकार के मनुष्यों की बात कही है... लेकिन ये नहीं बताया कि वो चार प्रकार कौन से है, कृपया समझाइए”?

भगवान बुद्ध अपने अनुयायी के इस प्रश्न का उत्तर देने लगे, उन्होंने कहा “मनुष्य चार प्रकार के होते हैं, जिनमें पहला होता है तिमिर (अंधकार) से तिमिर की ओर जाने वाला। दूसरा अंधकार से रोशनी की ओर जाने वाला, तीसरा ज्योति यानि प्रकाश से तिमिर की ओर जाने वाला और चौथा ज्योति से ज्योति की ओर जाने वाला”।

आगे बुद्ध बोले “राजन, जब कोई मनुष्य अपना पूरा जीवन बुरे कर्मों को करते-करते ही बिता देता तो वो तिमिर से तिमिर की ओर जाता है, वहीं दूसरी ओर जब कोई मनुष्य जन्म से भले ही अच्छे या ऊंचे कुल का ना हो, लेकिन उसके कर्म, वचन अच्छे हो, वह सदाचारी हो तो वो तिमिर से ज्योति की ओर जाने वाला होता है”।

“तीसरा व्यक्ति वो है जो अच्छे कुल में जन्मा हो, बलवान हो, उसकी काया बहुत आकर्षक हो, लेकिन मन-वचन-कर्म से वह दुराचारी हो तो ऐस मनुष्य ज्योति से तिमिर की ओर जाने वाले लोगों की श्रेणी में शामिल होता है। मनुष्य की चौथी श्रेणी है ज्योति से ज्योति की ओर जाने वाला, वो लोग जो अच्छे कुल में जन्में हो और अपने आचरण से भी बहुत शुद्ध और पवित्र हों, ऐसे मनुष्य ज्योति से ज्योति की ओर जाने वाले होते हैं”।