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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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सत्य की उपासना


मनुष्य को अपनी अपूर्णता बुरी लगी। उसने पूर्ण बनने की सोची और उपाय पूछने ब्रह्माजी के पास पहुँचा। ब्रह्माजी ने उसका अभिप्राय समझा और कहा  “वत्स! सत्य को धारण करना पूर्णता है। जिसके पास जितना सत्य होगा, वह उतनी ही पूर्णता प्राप्त कर लेगा। सो जा, तू सत्य की उपासना कर।”
    मनुष्य ने विनीत भाव से पूछा “भगवन्! सत्य की उपासना कैसे होती है?” प्रजापति ने कहा “उचित जिज्ञासा करते हुए उसका श्रद्धापूर्वक सही समाधान खोजने की चेष्टा को उपासना कहते हैं। इसी आधार से पूर्णता प्राप्त होती है।”
    प्रसन्नता पूर्वक मनुष्य लौट आया। उसने प्रयत्न भी आरंभ किया, पर परंपरागत रूढ़ियों के आगे उसका बस न चला, सत्य की उपासना अधूरी ही बनी रही।