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नफॅसुय म्योन छुय होस्तुय, अॅमि  हॅस्त्य्  मोंगनम् गरि गरि बल।  लछि मँज़ सासॅ मॅज़ अखा लोस्तुय, न त हातिनम् साॅरिय तल।। मेरा यह लोभी मन (पेटू) हाथी है। इस हाथी ने हर घड़ी बल मांगा है। इसके चंगुल से हाजारों-लाखों में से एकाध बचा हो तो हो, अन्यथा इसने सबको पददलित कर दिया है।

 

Today is 2nd July Thuresday 2020 : आज:- 2-जुलाई, 2020, गुरूवार है : हार, ज़ून, पछॖ, बाह (देवादेव), ब्रसवार : आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी, वीरवार / गुरुवार / बृहस्पतिवार : Aashaad Mass Shukla Pakash Duadashmiyaam Partamiyaam Triyodashmiyaam Guruvaasra : Month- Aashaad Mass, Pakash- Shukla Pakash Day- Duadeshi, Guruvar : अज़ छु स्वामी गोपी नाथ जियस वॊहरवोद : भगवान गोपी नाथ जयन्ती: हार बाह: लोक भवन यात्रा : श्री सप्तर्षि सम्वत- 5096 : Sapthrishi Samvat - 5096 : Kashmiri Pandit Nirvasan Samvat -31 : काशमीरी पंडित निर्वासन सम्वत -31 : विक्रमी सम्वत-2077 : Gregorian Calendar , ईसवी – 2020 :
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अहंकार



कमरे के एक कोने में धूपबत्ती जल रही थी, दूसरे कोने में पर मोमबत्ती। 
मोमबत्ती ने तिरस्कारपूर्वक धूपबत्ती को देखा और कहा “देखती नहीं मैं कितनी भाग्यवान हूँ। चारों ओर मेरा प्रकाश फैल रहा है। सबकी आँखें मेरी ओर रहती हैं।”
धूपबत्ती ने कहा “बहन! सो तो ठीक है, पर परीक्षा के कठिन समय में धैर्य और साहस के साथ अपनी जगह बनी रह सको, तभी चमक की सार्थकता है।”
मोमबत्ती ने बात अनसुनी कर दी।
हवा का एक तेज झोंका आया। मोमबत्ती बुझ गई, पर धूपबत्ती ने अपनी सुगंध और भी तेजी से बिखेरना शुरू कर दी। कमरे का आकाश बोला “वह चमक किस काम की जो एक झोंके का सामना भी न कर सके।” अपनी क्षुद्र क्षमता पर अहंकार व्यर्थ है।