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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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अभिमान

कौशाम्बी की एक विद्वान शास्त्रार्थ में जीत हासिल कर अभिमान से भर उठा। उसके बाद से वह एक मशाल लेकर चलने लगा। जब लोग उसके इस विचित्र आचरण के बारे में पूछतें तो वह उत्तर देता संसार इतना अंधकारपूर्ण है कि जहां तक हो सके उसे रोशनी दिखाने के लिए मैं यह मशाल लेकर चलता हूं।’ एक दिन एक बौद्ध भिक्षु ने यह सुना तो उसने कहा मित्र यदि तुम्हारी आंखे दिन के सर्वव्याप्त प्रकाश को नहीं देख पातीं तो इसमें दुनिया का नहीं तुम्हारा दोष है। तुम असल अंधकार को देख ही नहीं पा रहे हो। वह इस मशाल से दूर नहीं होगा।’

      क्या मतलब विद्वान ने पूछा। भिक्षु ने उत्तर दिया लोगों के भीतर से अशिक्षा और अज्ञान का अंधकार दूर करने की आवश्यकता  है और यह काम तुम उन्हें अपना ज्ञान देकर कर सकते हो। इस तरह दिन में भी मशाल लेकर चलने से तुम तेल और अपना ज्ञान दोनों व्यर्थ नष्ट कर रहे हो।’