ईश्वर आश्रम के ईश्वर स्वरूप के अर्पित श्रद्धा सुमन

ईश्वर आश्रम के ईश्वर स्वरूप के अर्पित श्रद्धा सुमन



ईश्वर आश्रम के ईश्वर स्वरूप के अर्पित श्रद्धा सुमन

काशीनाथ ज़ाडू

स्वामी लक्ष्मण जी के जन्मोत्सव वैशाख कृष्ण द्वादशी (24 अप्रैल) पर अर्पित श्रद्धा सुमन

 

महादेव पर्वत उपत्यका ईश्वर आश्रम जाज्वल्यमान

गुप्तगा सम्मुख ठहरी पाद प्रक्षालक झील महान।।

 

पंखपखेरू गूगू करते सप्तरंगों के पुष्प यहां

टहनियों पर फल सजाकर स्वागत करते विटप यहा।।

 

भक्तजनों का तांता लगता प्रेम से आता सभी जहान

प्रातः सायं ध्यान से करते सोऽहंसो का पाठ यहां।।

 

भेद न तेरे सम्मुख कोई शैवी सनातन बौद्ध समाज

ईसाई, सिख यवन जैनी धनी व निर्धन का सर ताज ॥

 

को शारदा जन्म लिया है पिता बना है हिंदुस्तान

विश्व महिमा तेरा यूरोप ऐशिया पाकिस्तान ।।

 

सत्य अहिंसा पाठ सिखाकर सदा ही रहते भगवद्धयान

मानवता के पुंजीभूत तुम मानवता का दिया है ज्ञान।।

 

प्रेम परस्पर सभी करें अब विश्व में वैर का रहे न नाम

ऊंच नीच का भेद मिटे सब मेरे "लक्ष्मण" दो वरदान ।।

 

उदाहरण फिर से यह मेरा देश शारदा-पीठ जहां

ठहरे बनकर यथापूर्व यह सभ्य संस्कृत लोग यहां।।

 

जय जय लक्ष्मण परम गुरु हे तुम हो उत्पलदेव समान

कय्यट जल्हण बाण सुशोभित देश में जन्मे शुभ संतान ।।

 

"काशीजाडू" विनय करता मानवता की दो पहिचान

समय अब शेष है थोड़ा त्यागूं धर्म के पथ पर प्राण ।।

 

यू-142 मंगोल पुरी, न. वि.- 13, (रचना काल-मई 1981 )

अस्वीकरण:

उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार अभिजीत चक्रवर्ती के व्यक्तिगत विचार हैं और कश्मीरीभट्टा .इन उपरोक्त लेख में व्यक्तविचारों के लिए जिम्मेदार नहीं है।

साभार:- काशीनाथ ज़ाडू एंव अप्रैल-मई 1995 कोशुर समाचार