हर ज़र ज़र में राम बसा है

हर ज़र ज़र में राम बसा है



Kamla Raina (Chowgam) कमला रैना (चौगाम)

हर ज़र ज़र में राम बसा है

राम तरन तार

जोगन बन कर आई हूं मैं

करले बेड़ा पार ॥

 

त्यागत त्यागत त्याग किया है

त्यागा नाही कुछ

राग दीशों से वापस आई

लाई नाही कुछ

आपके बिना जो कुछ पाया

कष्टों का बाज़ार

जोगन बनकर आई हुँ मैं

करले बेडा पार ॥

 

जग में कितने जीव जन्तु है

यह सब उदासी

मारे मारे फिरते है सब यह

है भ्रम फांसी

माता पिता बहन भाई कोई

ना ही सार

जोगन बनकर आई हुँ मैं

करले बेडा पार ।।

 

ना ही कोई दुशमन मेरा

ना ही कोई दोस्त

ना ही किसी का बरोसा

ना है किसी का बे बरोसा

घर बार छोड़ के आये हैं सब

तुम जगत आदार

जोगन बनकर आई हुँ मैं

करले बेडा पार ॥

 

मैं-मैं करके मैं ही भूला

भूल गया सब कोई

आपके सिवा में कुछ नाही

आप ही सबके होये

आपके पीछे दायें बायें

हर सोय है असरार

जोगन बनकर आई हुँ मैं

करले बेडा पार ॥

 

रूखा सूखा जो मिलता है

वह प्रालब का भोग

फिरना थुरना जो मिलता है

वह भवसर का रोग

आपकी सिदी आपकी बुदि

आप ही करता सार

जोगन बनकर आई हुँ मैं

करले बेडा पार ॥

 

आपके चरनों के नीचे आई

है कमला

आपका साया सर पर मेरे

हूं बे परवाह

यही है निशचय अपने मन में

आप ही सब के सार

जोगन बनकर आई हुँ मैं

करले बेड़ा पार ॥

साभारः कमला रैना (चौगाम)