मैं मुसाफिर हूँ बिखारी

मैं मुसाफिर हूँ बिखारी



Kamla Raina (Chowgam) कमला रैना (चौगाम)

मैं मुसाफिर हूँ बिखारी

डूंडतीहू आपको

जन्म जन्म मैं फिरी हूँ

आपकी तलाश में

अब मिली है तनहाई

डूंडती हूं आपको ॥

 

मुझे मालूम कुछ नहीं है

क्या मिला हमको यह फल

यह आपकी है मेहरबानी

डूंडती हूं आपको ॥

 

क्या हुआ है हाल मुझ पर

जाल माया का है यह

जब हुई मुझ से जुदाई

डूंडती हूं आपको ॥

 

क्या बताऊगी मैं आपको

मैं किसी की भी नहीं

आपके बिना कोई नहीं मेरा

डूंडती हूं आपको ॥

 

क्षन भर मे दुनिया बदलती है

हमारे सामने

देखती हूं आपकी बड़ाई

डूंडती हूं आपको ॥

 

मैं बताऊं हाल अपना

यह कहने के लायक नहीं

क्या निशआना था मुझपर

ढूंढती हूं आपको ॥

 

दुनिया बदल जाती है

आदमी बदलते रहते हैं।

खबर क्या क्या होने वाला है

डूंडती हूं आपको ॥

 

यहा की सब फिजायें हैं

यह आपके नज़ारे हैं

आपकी शरण आई ह कमला

ढूंढती हूं आपको ॥

साभारः कमला रैना (चौगाम)