फोड़ गया मटकी तेरा श्याम सलोना फोड़ गाया।
तोड़ गया मटकी तेरा मनमोहन जो तोड़ गया।।
माखन खाया मुख लटपटाया दूध दही न छोड़ा।
ग्वालो को संग लेकर इसने हर मटकी को तोड़ा।।
झूठी तोहमत तुम न लगाना श्याम नहीं है ऐसा।
अपने मोहन को मैं जानूँ काम करे वो कैसा।।
पकड़ कलाई श्याम को लाई सब कुछ ठीक था पाया।
दंग रह गई सखी देख के समझ न उसको आया।।
मैंने कहा था सुन री ललिता श्याम नहीं है ऐसा।
अपने मोहन को पहचानूँ काम है उसका कैसा।।
दिन भर वो तो गऊएँ चराये साँझ परे घर आये।
तनिक सा माखन मिश्री खाकर सपनों में खो जाये।।
इक दिन ग्वालों को संग लेकर अपने ही घर आया।
चोरी करने का मोहन ने रास्ता नया बनाया।।
बलदाऊ को बाहार करके माखन लगे वो खाने।
इतने में थी मैय्या आई सबको लगे भगाने।।
भाग गए सब संगी साथी मोहन हाथ था आया।
बोली मैय्या मुँह तो खोलो क्या है इसमें छिपाया।।
पकड़ कलाई बाहार लाई श्याम ने मुख ना खोला।
छड़ी उठाकर लगी डराने तब ही श्याम जो बोला।।
खोल दिया श्यामसुन्दर ने मैय्या देख ना पाई।
कुल ब्रह्माँड समाया उसमें समझ न उसको आई।।
श्याम की लीला श्याम ही जाने और न जाने कोय।
श्याम केवल वो ही जाने श्याम का जो हो जाए।।