


इतिहास
इतिहास गवाह है कि दुनिया में हमेशा शक्तिशाली ने राज किया है। माला जपने, मंत्रोच्चार और शांति उपदेशों से लड़ाईयां नहीं जीती जा सकतीं। समय आ गया है जब शठ को शठता से ही निपटना होगा। सांप काटे तो नहीं मगर फूत्कारे तो सही। इजराईल चारों ओर से दुश्मनों से घिरा है मगर अपनी सैन्य क्षमता, जुझारूपन और आक्रमता से सभी पड़ोसी देश उससे खौफ खाते हैं। वह भी शांति, अमन, पीस आदि की बात करता तो उसका वजूद ही खत्म हुआ होता। इस्लामी अथवा तालिबानी आतंकवाद इसलिए परवान चढ़ा क्योंकि इसको चुनौती देने वाला कोई दूसरा संगठन तैयार नहीं हुआ। कभी कभी सोचता हूं कि कश्मीर में अगर पंडितों को अपने बचाव के लिए अस्त्र-शस्त्र दिए गए होते, इनको चलाने की ट्रेनिंग दी गई होती और वे संख्या में तनिक ज्यादा होते तो क्या मजाल थी कि उन्हें घाटी से खदेड़ा जाता। मगर बात फिर वहीं आकर अटक जाती है कि हम अहिंसा के पूजारी हैं, अस्त्र-शस्त्र उठाना पाप है। संभवतः इसी मानसिकता की वजह से हम सदियों तक गुलाम बने रहे। -
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साभार:- शिबन कृष्ण रैणा एंव कॉशुर समाचार सितम्बर ,2018