


ऑटम मॉज करतम दया
कोल छुस मॉजे बोल बोश अनतम,
ऑटम द्वह अज़ हलम वरतम।
ताप घुस दोडमुत शुहुल करनावतम।।
ऑटम द्वह अज़ हलम बरतम ।
औन घुस रोन घुस प्रकाश अनतम,
करतम कड़ा चारा में।
स्यद्ध पीठ प्यट स्पॅज नज़रा करतम ।।
ऑटम द्वह अज हलम बरतम ॥
चन्द्र छौन पर छयौन लोसवुन सिर्यि जन,
सनम्वख मॉजे हावतम पान
भवसर क्रमने मदु बेचिरावतम।।
ऑठम द्वह अज़ हलम बरतम ।।
डुल यिनु गछू मॉज थक चीर करतम,
बरतम शुर्य सुन्द लोला में।
अडवीथ दरवाज़ पूर मुचुरावतम।।
ऑटम द्वह अज हलम बरतम ।।
शा मंजु कइतम बोट मॉज लागतम,
हो हो कयय पादन बो।
यूगु गर्भस मंज़ मतु मन्दुछावतम ।।
ऑटम द्वह अज हलम बरतम ।।
भाव बोछ छुस बो लोल क्वंड बरतम,
करतम अथुरोट रछितम लाज
गरि गरि म्योन घर ग्वरद्वार करतम ।।
ऑठम द्वह अज़ हलम बरतम ।।
मनुक्यन वरकन गद्य गद्य गॉमित्य,
मिचुर्य में चामुत्य जिगरस छिम
हमसू आगरुक अमृयत चावतम ।।
ऑठम द्वह अज हलम बरतम ।
रिंदु समुह स्यन्दि ानु आमुत,
कुस रंग छु चामुत युस छु प्रजलान।
स्यन्दि मंज पम्पोश मन फोल रावतम ।।
ऑठम द्वह अज हलम बरतम ।।
पापन हुन्द्य गंड शख्ति नार जालतम,
पाशापु निश दूर थवतम मॉज ।
नेरनुच तोर सखरा करनावतम ।
ऑठम द्वह अज़ हलम बरतम ।।
प्राणायामस मंज़ बाग बेहतम,
त्रावतम 'गरीबस' यूगु द्रष्टी ।
तन-मन प्राणु पन पतु कतुनावतम ।।
ऑठम द्वह अज़ हलम बरतम ।।
अस्वीकरण:
उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार अभिजीत चक्रवर्ती के व्यक्तिगत विचार हैं और कश्मीरीभट्टा .इन उपरोक्त लेख में व्यक्तविचारों के लिए जिम्मेदार नहीं है।
साभार:- आनंद स्वामी प्राणनाथ भट्ट "गरीब" 'भाई जी' एंव कॉशुर समाचार मई 2018