

गैरजिम्मेदार एवं अमानवीय मीडिया
मीडिया के विस्तार को देखते हुए समस्त संसार ने इस बात पर बहुत खुशी जतायी कि अब मानव संचार में ऐसी क्रांति उत्पन्न हो गई है कि जिसके कारण हजारों मीलों की दूरिया सिमट कर रह गई हैं और मावन एक दूसरे के बहुत करीब हो गये हैं। एक बात को पल भर में लाखों करोड़ों लोगों तक न केवल पहुंचाया जा सकता है अपितु इन्हें प्रभावित करके लक्ष्य अनुरूप अपने वश में भी किया जा सकता है और तत्पश्चात इनसे वह सब कुछ कराया जा सकता है जो आपका मशा हो। दूसरे विश्व युद्ध में ही इस बात का पता चल गयाथा कि मीडिया प्रचार के माध्यम से कैसे युद्ध में दुष्प्रचार को हथियार बनाकर दुश्मनों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करके उन में हडबडी और अफरातफरी फैलाई जा सकती है। इन बातों को नजर में रखते हुए सरकार ने मीडिया को मर्यादित करने के लिए मीडिया रेग्यूलेशन बनाये और मीडिया को इनकी पालना के लिए बाध्य बनाया।
किन्तु हमारे मीडिया का बहुत कुत्सित और विखंडित चेहरा सारे भारत ने तब देखा जब समस्त जम्मू की जनता ने जम्मू ने जम्मू बार एसोसियेशन के नेतृत्व में महबूबा मुफ्ती और भाजपा की मिलीजुली सरकार द्वारा जम्मू में रूहिंग्या और बगलादेशी मुसलमानों को जानबूझ कर बसाये जाने के विरोध में एक जलूस निकाला। इस जलूस का मुख्य उद्देश्य और ध्येय केन्द्र सरकार का ध्यान जम्मू की प्रमुख समस्याओं की ओर आकर्षित करना था.
जिनकी वजह से उनके कथनानुसार जम्मू के साथ न केवल हर स्तर पर और हर क्षेत्र में दारुण भेदभाव बरता जा रहा है अर्पित विदेशी मुसलमानों को जम्मू से हजारों किलोमीटर दूर से जम्मू में लाकर एक सोचे समझे षडयंत्र के अंतरगत बसाकर जम्मू की हिन्दू जनसंख्या को प्रभावित करके यहां कश्मीर जैसे हालात उत्पन्न करने की जोरों से तैयारी चल रही है।
यहा विदेशी रूहिंग्या को बसाया जाना इसलिए भी बहुत खतरनाक है क्योंकि बहुत बड़ा इलाका पाकिस्तान बार्डर से मिलता है और आये दिन यहां पाकिस्तान अपने घुसपैठिये भेजने के लिए बार्डर पर सीमा का उलघन करता है। विदेशी रूहिंग्या के तार आतंकवादी संगठनों से पहले ही मिले हुये हैं। जिस तेजी से इनको जम्मू में सारी सुविधायें उत्पन्न करायी जा रही हैं, जिस प्रकार से आनन फानन में इनके आधारकार्ड, पहचानपत्र बन रहे हैं और बाजार व मदरसे खुल रहें हैं, मसजिदें बन रही हैं, सब एक सोचे समझे षडयंत्र का हिस्सा साफ नजर आ रहा है। ये सब सरकार की नाक के नीचे कैसे हो पा रहा है? यह निश्चित रूप से बहुत ही गंभीर चिंता का विषय है। इसके अतिरिक्त जम्मू की सिवल सुसाइटी ने कठुआ में हुए 8 साल की बच्ची की बर्बर हत्या और रेप के सिलसिले में हो रही जाच पर प्रश्न उठाते इसकी जांच केन्द्रीय अजेन्सी को सौंपने की मांग भी अपनी मांगों में रखी थी। श्रीनगर से सारे न्यूज रिपोर्टरों ने, अन्य सारे विषय दबाकर, बच्ची की हत्या और रेप के मामले में जम्मू के हिन्दू संगठन को रेप और हत्या करने वालों का समर्थक बताकर इस विषय को लेकर न केवल देश के समस्त मीडिया जगत को गुमराह किया बल्कि एक पूर्व नियोजित चाल को अन्जाम देते हुए इसको साम्प्रदायिक रंग देकर लिया। हिन्दू अतिवाद और बर्बतावाद का घिनौना नमूना बनाकर प्रचारित और प्रसारित किया। इस सम्बन्ध में समस्त देश के मीडिया ने अति उत्साहित होकर मीडिया की मर्यादा सम्बद्ध सारी हदे रौंदते प्रताड़ित बच्ची की तस्वीर उस का धर्म और आरोपी हत्यारों और बलात्कारियों की पहचान और धर्म को उछालते हर चन्द साप्रदायिक रंग में रंग कर हिन्दू के प्रति न केवल राष्ट्रीय अपितु अंतराष्ट्रीय स्तर पर घृणा
एवं भर्तसना का माहौल तैयार किया, जिसके लिए देश के न्यायालय इनको न केवल खरी खोटी सुनाई अपितु दस दस लाख का जुर्माना भी लगा लिया।
होना तो यह चाहिए था कि इस गंभीर विषय को मीडिया संज्ञान में लेकर इस पर सरकार का और समस्त देशवासियों का ध्यान आकर्षित करती पर हुआ इसके बिलकुल विपरीत। मीडिया ने वो किया जो केवल मानवता को शर्मसार करने वाला मीडिया ही करता है। भारतीय मीडिया के इतिहास में यह सच में एक काला दिन था।
अस्वीकरण :
उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं और kashmiribhatta.in उपरोक्त लेख में व्यक्त विचारों के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं है। लेख इसके संबंधित स्वामी या स्वामियों का है और यह साइट इस पर किसी अधिकार का दावा नहीं करती है।कॉपीराइट अधिनियम 1976 की धारा 107 के तहत कॉपीराइट अस्वीकरणए आलोचनाए टिप्पणीए समाचार रिपोर्टिंग, शिक्षण, छात्रवृत्ति, शिक्षा और अनुसंधान जैसे उद्देश्यों के लिए "उचित उपयोग" किया जा सकता है। उचित उपयोग कॉपीराइट क़ानून द्वारा अनुमत उपयोग है जो अन्यथा उल्लंघनकारी हो सकता है।
साभार:- महाराज शाह एंव कॉशुर समाचार मई 2018