


भारतीय वामपंथी विचारधारा का वास्तविक सच क्या है
आधुनिक युग में वामपंथी विचारधारा एक ऐसा इकलौता दर्शन है जिसने योरोप में पुरातन काल से फैलाये इस झूठ को पुरी तरह ध्वस्त किया कि अमीरी गरीबी उंच -नीच राजा रंक का होना किसी प्राकृतिक विधान का नतीजा है। वास्तव में माक्र्स के आते आते अस बात को काफी हद तक बल मिल चुका था। कि प्रकृति किसी भी व्यक्ति को अमीर या गरीब बनाकर नही भेजती है जो कुछ होता है मानव द्वारा बनाये सामाजिक व राजनीतिक तंत्र के अनुरूप ही होता है।
जब जैसी सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था रही है उसी अनुपात से मानव जीवन उस व्यवस्था से प्रभावित रहा है। माक्र्स का मानना है कि प्राकृतिक संसाधन जिसमे मनुष्य और उसके जीवन से सम्बन्ध सभी प्राकृतिक संसाधन हवा पानी धरती आकाश खनिज माल मवेशी आचार विचार योग और संयोग एवं इन चीजों से सत्पादित सारे उपकरण उत्पाद एवं वस्तुए सब प्रकृति प्रदत्त है और इन पर सबका समान अधिकार है ।
इस अधिकार को ताकत अथवा छल -बलपूर्वक कोई वर्ग विशेष अथवा समाज विशेष अपने कब्जे में करके अपने नियन्त्रण में लेकर बाकी सारे बहुसंख्यक मनुष्यों को इन प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकारो से वंचित करता है और इस तरह सामाजिक व्यवस्था को अपने हितानुरूप कर देता है।
इस स्थिति के अनेक सोपान गिनाये अथवा बताए गये है कि जिसके चलते ऐसी व्यवस्था बनती गई जहां एक मनुष्य स्वामी कहलाया और दुसरा दास एक राजा और दुसरा प्रजा एक कुलीन और दुसरा अकुलीन । इस व्यवस्था के मूल में ईश्वर का जरा भर भी हाथ नहीं है इसको इस बात ने साबित कर दिया कि यह पुरातन काल से चली आई व्यवस्थायें नई सोच और नये युग के आगे धाराशायी हो गई । दासता के युग का अंत हुआ और क्रांति का दौर दौरा हर जगह सामने आया जिसके पीछे वैज्ञानिक सोच के अविर्भाव का बहुत बड़ा हाथ है। अंधकार को मिटाने में विज्ञान ने अधिक योगदान दिया।
सामाजिक संतुलन को बनाये रखने के लिये इस बात को मूल रूप से स्वीकार किया गया कि प्रकृति ने सारे मूलमंत्र पर पानी फेर कर भारतीय समाज को भारतीय संसाधनों पर कुण्डली मार कर बैठे हुए और अपने कब्जे में इन संसाधनों को कर शेष भारतवासियों को इन संसाधनों के समुचित उपभोग से बेदखल कर इन पर विराजमान धनपतियों को बात करते देखा है और न ही किसी तरह भी इस सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक कुचक्र को उजागर करते देखा है । इसके उल्ट भारतीय वामपंथ देश की समस्त संपदा पर काबिज इस एक प्रतिशत धनकुबेर के हितों में खड़ा और अड़ा देश को जाति धर्म प्रांत जिहाद की राजनीति में देश के युवा वर्ग को पथभ्रष्ट करने में साफ तौर पर नजर आता है । ये लोग किस कोण से खुद को वामपंथी कहाते है। इनका वामपंथ एक ढोंग और ढकोसले के सिवा कुछ भी नही है जो देश की स्वतत्रंता प्रजातंत्र और सामाजिक न्याय के लिए बहुत बड़ा खतरा है।
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साभार:- महाराज शाह एंव कॉशुर समाचार अप्रैल,2018