घाटी के सरकारी स्कूलों में देशद्रोह की सीख!

- घाटी के सरकारी स्कूलों में देशद्रोह की सीख!




घाटी के सरकारी स्कूलों में देशद्रोह की सीख!

 

कश्मीर में भारत के विरुद्ध न केवल अलगावादी नेताओं का दुष्प्रचार बेरोकटोक जारी है अपितु वर्तमान बीजेपी पीडीपी गठबंधन की सरकार द्वारा चलाये जा रहे सरकारी स्कूलों में विगत कई वर्षों से ऐसे अध्यापक नियुक्त हुए हैं जो बच्चों को भारत के प्रति वैमनस्य का दरस देते हैं और इनका मस्तिष्क भारत के प्रति नफरत से भर देते हैं।

इन्हें बताया जाता है कि भारत मुस्लमानों का नहीं हिन्दुओं का देश है। हिन्दू भारत के प्रति इनका मन विद्वेष और घृणा से इस हद तक भर दिया जाता है कि वे भारत से ही नफरत करने लगते हैं।

बच्चों को इस तरह पकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवाद के समर्थन के लिए तैयार किया जा रहा है। इसका नतीजा यह निकलता है कि 1. बच्चे उसी भारतीय सैना को जो आतंकवाद के खिलाफ युद्धरत हो कर इन बच्चों की व इनके परिवार के सदस्यों की सुरक्षा अपने प्राणों की बलि देकर करती है. अपना दुश्मन मानने लगती है और जो वास्तव में दुश्मन हैं उन्हें दोस्त समझने की भूल कर बैठते हैं, इन बच्चों में अधिकतर बच्चे कमसिन उम्र के हैं जिनको वश में करना आसान होता है। मजहबी जनून और धार्मिक विभाजन और कट्टरवाद की दीक्षा देकर इन बच्चों को सैना के साथ ऐसी जगहों पर दो-दो हाथ होने को तैयार किया जाता है जहां सैना का आतंकवाद विरोधी अभियान चल रहा हो या उपद्रवियों के खिलाफ कार्यवाई हो रही हो।

सैना की कार्यवाई में अवरोध डालने के लिए सैना पर पथराव करना गोले बरसाना या आतंकियों की ढाल बनकर सैना का रास्ता रोकना और सैनिकों पर जानलेवा हमला करना, उनके हाथों से बन्दूकें छीनना, उनको अपनी सामूहिक हिंसा का शिकार बनाने के लिए इन्हें हर तरह से तैयार किया जाता है, और सारे तथाकथित सभ्य समाज, प्रशासन सरकार एवं प्रतिपक्ष के राजनीतिक कार्यकर्ताओं की इन कुकृतियों को अनदेखा कर केवल और केवल सैना की आलोचना करना और सैना को दोष देना एक कायर बुजदिल दोगले और बेइमान सभ्यता एवं संस्कृति की निशानी के सिवा कुछ नहीं हो सकता। ऐसे बच्चों, नौजवानों को बेगुनाह समझ कर बिना किसी उचित दण्ड के या बिना परिसंस्करण के इन्हें मुक्त छोड़ना इनके दुःसाहस को बढ़ाने के सिवा और क्या हो सकता है। इसके दुष्परिणाम किसको भुगतने पड़ते हैं?

कब तक हमारे सैनिकों को उस नेतृत्व के आगे विवश होकर अपने आपको बेबस रोके रखना होगा और अपमान के घूट पीना होगा ?

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साभार:- महाराज शाह एंव कॉशुर समाचार 2018, फ़रवरी