अमरनाथ तीर्थ

- अमरनाथ तीर्थ




अमरनाथ तीर्थ

भारतवर्ष तीर्थों क पवि भमिूमि है। इस धरा पर शायद ह ऐसा कोई ांत होगा जहाँतीर्थर्थ थल न हो। येतीर्थर्थ थल दर्घकर्घ ाल सेआथा एवंवि वास के मखु क रहेह। कमीर ांत म स्थि त 'अमरनाथ नामक तीर्थर्थ थल का वि शषे महव है। कहण क 'राजतरंगि णी मइस तीर्थ को अमरेवर बताया गया है। भारत के वि भि न े मस्थि त शि व के वादश योति र्लिं गर्लिं सोमनाथ मल्लि कार्जुनर्जु , महाकालेवर, ॐकारेवर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी वि वनाथ आदि के अति रि त 'अमरनाथ' का वि शषे महव है। शि व के मखु थल मअमरनाथ अयतम है। अतः अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है। अमरनाथ तीर्थर्थ थल जम-ूकमीर राय के ीनगर शहर के उर-पर्वू र्वम141 कि लोमीटर दरू समु तल से 3.888 मीटर (12756 फुट) क ऊं चाई पर स्थि त है। इस गफु ा क लबं ाई (भीतर क ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। यह गफु ा लगभग 150 फट े मफैल हैऔर गफु ा 11 मीटर ऊं ची है। कृति का अभतु वभै व अमरनाथ गफु ा, भगवान शि व के मखु धार्मि कर्मि थल मसे30 एक है। एक पौराणि क गाथा के अनसु ार भगवान शि व नेपार्वतर्व ी को अमरव का रहय (जीवन और मृयुके रहय) बतानेके लि ए इसी गफु ा को चनु ा था। मृयुको जीतनेवालेमृयजंु य शि व अमर ह, इसीलि ए 'अमरेवर' भी कहलातेह। धालु'अमरेवर' को ह अमरनाथ कहकर पकु ारतेह। शि व भत इसेबाबा अमरनाथ या बर्फा नी-बाबा भी कहतेह। अमरनाथ हि दं के दो शद 'अमर' अर्था त 'अनवर' और 'नाथ' अर्था त 'भगवान' को जोड़नेसेबनता है। एक पौराणि क कथा के अनसु ार जब देवी पार्वतर्व ी नेभगवान शि व सेअमरव के रहय को कट करनेके लि येकहा, जो वेउनसेलबं े समय सेछि पा रहेथे, तब यह रहय बतानेके लि येभगवान शि व, पार्वतर्व ी को हि मालय क इस गफु ा मलेगए, ताकि उनका यह रहय कोई भी न सनु पायेऔर यहंपर भगवान शि व नेदेवी पार्वतर्व ी को अमरव का रहय बताया था। बदंू के जम जानेक वजह सेठोस बर्फ क एक 40 मीटर ऊँची अमरनाथ गफु ा मपानी क सदंुर मर्तिूर्ति बन जाती है। हि दूधर्म के लोग इसी बर्फी ल मर्तिूर्ति को शि वलि गं मानतेहै। कहा जाता हैक भगवान शि व पहलगाम (बलै गाँव) मनदं और बलै को छोड़ गए थे। चदं नवाड़ी मउहनेअपनी जटाओ सेच को छोड़ा था और शषे नाग सरोवर के कि नारेउहनेअपना सॉप छोड़ा था। महागनु ास (महागणेश पहाडी) पर्वतर्व पर उहनेभगवान गणेश को छोड़ा था। पजं तारनी पर उहनेपाँच तवः पानी हया आग और आकाश छोड़ा था। इस कार दनिुनिया क सभी चीज का याग भगवान शि व नेवहाँतांडव नृय कि या था हो ओत मभगवान शि व देवी पार्वतर्व ी के साथ े गफु ा अमरनाथ आयेथे। इति हासकार का वि चार हैकि अमरनाथ याा हजार वर्षों से चल या रह हैतथा अमरनाथ-दर्शनर्श हा महव परुाण मभी मि लता है। बगृ ेश सहि तं ा, बेलमत परुाण, कहण क राजतरंगि नी आदि मइस तीर्थ का बराबर उलेख मि लता है। नीलमत परुाण मअमरेवर के बारेमदि ए गए उलेख सेपता चलता हैकि इस तीर्थ के बारेमछठ सातवीं हताद मभी लोग को जानकार थी। कमीर के सान शासक मसेएक थेजनै लु बुदन (1420-70 ईवी) जि हकमीर लोग यार से'बड़शाह कहतेह। माना जाता हैकि उहनेभी अमरनाथ एका क याा क थी। (इस बारेमइति हासकार शने राज ने उलेख कि या है।) अकबर के इति हासकार अबलु फजल (16वींशताद) नेराइना-ए-अकबर मभी उलेख कि या हैकि लरनाथ एक पवि तीर्थर्थ थल है। गफु ा मबर्फ हा एक बलु बलु ा बनता हैजो थोड़ा-थोड़ा करके ५ दि न तक रोजाना बढ़ता रहता हैऔर दो गज सेअधि क ऊं चा हो जाता है। चमा के घटनेके साथ-साथ वह भी घटना शु कर देता हैऔर अ चांद लुत हो जाता हैतो शि वलि गं भी वि लुत ह जाता है। वामी वि वेकानद ने 1898 म8 अगत को अमरनाथ गफु ा क याा क थी और बद मउहनेगदगद होकर कहा कि मझु ेसचमचु लगा कि बर्फ का लि गं वयंशि व ह। मन ेऐसी सुदर इतनी ेरणादायक कोई चीज नहंदेखी ह न ह कि सी धार्मि कर्मि थल क याा का इतना आनद आया। इस याा का सबसेअछा समय गु पर्णिूर्णिमर्णि ा और ावण पर्णिूर्णिमर्णि ा के समय महोता है। जम-ूकमीर सरकार नेधालओु /ं तीर्थयर्थ ात्रि य क सखु -सविुविधाओंके लि ये रातेभर मसभी सविुविधाएं उपलध करवाई हैताकि भतजन आसानी सेअपनी अमरनाथ याा परू कर सक। जमूसेलेकर पहलगाम (7500 फट) तक क बस सेवा भी उपलध है। अधि कारि क तौर पर याा का आयोजन राय सरकार ी अमरनाथ ाइन बोर्ड के साथ मि लकर कराती है। सरकार एजसी याा के दौरान अपेक्षि त सभी सखु -सविुविधाएं धालओु ंको दान करती है, जि नमऊनी कपड,े खाना, टट, टेलकयनिूनिकेशन जसै ी सभी सविुविधाएंशामि ल है। इसके अलावा गफु ा के रातेमबहुत सी समाजसेवी सं थाएं दालओु ंको खाना, आराम करनेके लि येटट या पडं ाल क यवथा भी करतेहै। नि चलेकप सेपजं तारनी (गफु ा से6 कि लोमीटर) तक क हेलि कॉटर सविुविधा भी अब उपलध है। अमरनाथ क याा ीनगर स्थि त दशनामी अखाड़ा सेावण मास क पचं मी ति थि को ारभ होती हैऔर पहलगाम मकती हैऔर पनु ः वादशी ति थि को थान ारभ होता है। ावण मास मपवि हि मलि गं के दर्शनर्श ार्थ लाख लोग भि न-भि न देश सेयहाँ आतेह। जसै ा कि पर्वू र्वमकहा गया कि गफु ा मऊपर सेबर्फ के पानी क बदंूय य गि रती रहती हऔर यहं पर एक ऐसा थान है. जहाँइन बदंू सेलगभग दस फुट ऊँचा शि वलि गं बनता है। चं मा के घटने-बढ़नेके साथ ह इस हि मलि गं का आकार भी परि वर्ति तर्ति होता है. जो ावण पर्णिूर्णिमर्णि ा को अपनेपर्णू र्णप मआ जाता हैतथा अमावया तक धीरे-धीरेछोटा हो जाता है। वि मय का वि षय यह हैकि गफु ा मसामायतः कची बर्फ ह दि खाई देती हैजो भरुभरु होती हैलेकि न यह शि वलि गं ठोस बर्फ का बना होता है। मु य शि वलि गं सेकुछ दरू पर गणेश भरैव तथा पार्वतर्व ी के पथृ क-पधृ क हि मलि गं प भी ष्टि गत होतेह। कोशर जलाई अमरनाथ क गफु ार तक पहुंचनेके लि ए सामायत ो मार्ग है. थम पहलगाम भार्ग और दसू रा सोनमर्ग-र्गकलतल मार्ग। पहलगाम मार्ग अपेाकृत सविुविधाजनक हैजबकि बालतल मार्ग हालांकि अमरनाथ क गफु ा सेमा 14 कि लोमीटर क दरू पर है. लेकि न यह मार्ग अयतं दर्गु मर्ग है। सामायतः याी पहलगाम मार्ग सेह अमरनाथ याा करतेह। पहलगाम सेअमरनाथ क दरू 45 कि लोमीटर है। इस याा मार्ग मचदं नबाडी शषे नाग तथा पचं तरणी तीन मखु रात्रि पड़ाव है। थम पडाव चदं नबाड़ी है. जो पहलगाम से128 कि लोमीटर क दरू पर है। तीर्थयर्थ ाी पहल रात यहंपर बि तातेह। दसू रेदि न पि सूघाट क चढ़ाई ारभ होती है। चदं नबाड़ी से13 कि लोमीटर दरू शषे नाग मअगला पड़ाव है। यह चढ़ाई अयतं दर्गु मर्ग है। यहंपर पि सूघाट के दर्शनर्श होतेह। परू याा मपि सूघाट का मार्ग बहुत कठि न है। पि सूघाट समु तल से11,120 फुट क ऊँचाई पर है। इसके पचात याी शषे नाग पहुँचतेहै। लगभग डढ़े कि लोमीटर लबाई मफैल हुई झील अयतं सदंुर है। तीर्थयर्थ ाी रात्रि मयहंवि ाम करतेह। तीसरेदि न याा पनु ः आरभ होती है। इस याा मार्ग ममहागणु ास दरेको पार करना पड़ता है। महागणु ास सेपचं तरणी का परूा राता ढलान युत है। छोट-छोट पाँच नदि य के बहनेके कारण यह थान पचं तरणी नाम सेसि ध हुआ है। पचं तरणी सेअमरनाथ क पवि गफु ा 6 कि लोमीटर क दरू पर है। गफु ा के समीप पहुँचकर पड़ाव डाल दि या जाता हैतथा ातःकाल पजू न इयादि के पचात शि व के हि मलि गं के दर्शनर्श ोपरांत भतजन पुय लाभ के भागीदार बनतेह। जसै ा कि पर्वू र्वमकहा जा चकु ा हकि शि व नेपार्वतर्व ी को अमरव का उपदेश इसी गफु ा मदि या था। जब वेउहउपदेश देरहेथेतो उस समय कपोतवय (दो कबतू र) भी वहंआसपास मौजदू थेजि हनेयह उपदेश सनु ा। धालुइहअमरपी कहतेहजो शि व वारा पार्वतर्व ी को दि ए गए अमराव के उपदेश को सनु कर अमर हो गए। आज क जि न धालओु ंको येकपोतवय दि खाई देतेहतो ऐसा माना जाता हैकि उहशि व-पार्वतर्व ी नेअपनेय दर्शनर्श दि ए ह। ति वर्ष सपन होनेवाल इस पुयशालि नी याा सेअनेक पुपा फल क ाप्ति होती है। ऐसा माना जाता हैकि अमरनाथ दर्शनर्श और पजू न सेमहापुय ात होता है। शा मइंद्रि य नि ह पर वि शषे बल दि या गया हैजि ससेमक्तिुक्ति क ाप्ति होती है। शा मवर्णि तर्णि हैकि अमरनाथ याा नि ह के बि ना ह मक्तिुक्ति दान करनेवाल हैयकि यााम मआनेवाल कठि नाइय तथा गतं य थल पर पहुँचकर होनेवाले हर्ष-र्षवि षाद मि श्रि त अनेकवि ध अनभु व के कारण तीर्थयर्थ ाी को वि वि ध कार के सांसारि क कट का बोध होता हैतथा साथ ह शि व के हि मलि गं प के दर्शनर्श सेउसका दय इतना सयं मि त हो जाता हैकि इंद्रि य-नि ह कि ए बि ना ह उसेमक्तिुक्ति ात होती है। शा मइस बात का भी उलेख मि लता हैकि अमरेवर/ अमरनाथ के दर्शनर्श अयतं पुयदायी है। बाबा अमरनाथ अपनेभत के समत भवरोग यथाः आयात्मि क, आधि भौति क एवंआधि दैवि क दचु का समलू नाश करतेह। अमरनाथ-याा सेसबं धिं धित एक अयतं महवपर्णू र्ण और यावहारि क तय यह हैकि यह याा पारपरि क सदभाव के चार-सार का कार्य भी करती है। वि भि न ांत सेशि व के दर्शनर्श ार्थ आनेवालेलोग मपरपर समभाव क भावना वि कसि त होती है, वि भि न भाषा-भाषी लोग नेपरपर वार्ता लाप होता है, भाईचारेक भावना का वि कास होता हैऔर वि भि न ाती क भौगोलि क जानकार का आदान-दान होता है। अतः अमरनाथ तीर्थ को तीर्था टन के अति रि त धा, ान एवंसौहार्द के समुचय के प ममाना जा सकता है।

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साभारः  डॉ. शि बन कृण रैणा  "कोशुर समाचार" – 2025, जुलाई