गड़िुया

- गड़िुया




गड़िुया

 

बड़ी बी को कई दि न तक मवू ा देखकर एक पडोसन को उस पर दया आई और उसनेउसेमुठ भर अनाज दान मदि या। बड़ी बी नेअनाज साफ कि या और उसेहडि या म पकानेलगी। साथ ह साग के दो-चार पेऔर चटुक भर नमक भी हंडि या मडाला। थोड़ी ह देर मखि चड़ी पककर तयै ार हो गई जि सक महक सेबड़ी बी क भखू और तजे हो गई। लेकि न योह उसनेखानेक नीयत सेबरतन महाथ डाला, बाहर सेकि सी जोगी नेआवाज द-'अलख नि रंजन बड़ी बी खि चड़ी का बरतन हाथ म लेकर बाहर आई। उसके सामनेएक समोहक और तजे वी जोगी खड़ा था। वह भी शायद भखू ा था और इसीलि ए सार खि चड़ी तरुत चट कर गया। फि र भरपेट पानी पीकर उसनेबड़ी बी क ओर ष्टि डाल। बड़ी बी नेउसके चरण धाम लि ये। जोगी नेमुकराकर झोल महाथ डाला और उसमसेएक छोट-सी सुदर गड़िुड़िया नि काल। गड़िुड़िया बड़ी बी के हाथ मदेकर वह खदु जानेकहाँचला गया। गड़िुड़िया हाथ मलेतेह बड़ी बी का मन मत हो गया और वह सार भखू -यास भलू गई। परतुअचानक यह या हुआ? गड़िुड़िया तकाल बढ़नेलगी और देखत-ेह-देखतेएक यार सी सुदर लड़क मबदल गई। तनि क हैरान तनि क परेशान, तनि क भयभीत और तनि क सन होकर बड़ी बी आखँ गड़ाकर जीवि त गडिुडिया को नि हारनेलगी। तभी मर्गेु र्गेनेबाग द और गड़ि या के मखु सेभी आवाज नि कल-बड़ी बी।" बढ़ बी नेकुछ नहंकहा। बस उसेपर्वूवर्व त नेहारती रह। 'बड़ी बी, मतुहार बेट हूँ। गड़िुड़िया नेहँसत-ेहँसतेकहा और उसके मखु सेफूल बरसनेलगे-भाँति -भाँति 3 के रंग-बि रंगी महकतेफूल। बड़ी बी क सार झोपड़ी सगु धं सेसराबोर हो गई। "बड़ी बी।" गड़िुड़िया बोल-तुहार सार गरबी अभी दरू हो जाएगी। उठो और येफूल बेचनेके लि ए हाट मलेजाओ। बात बढ़ बी क समझ म नहंआई। फि र भी उसनेफूल समेटकर टोकर मभरेऔर हाट क ओर चल ल। ऐसेनि रालेऔर इस तरह महकतेफूल देखकर लोग हैरान हो गए। बड़ी बी के सारेफूल देखत-ेदेखतेअछेदाम मबि क गए। सभी बड़ी बी के फूल क बडाई करनेलगेऔर धीरे-धीरेउनक चर्चा चार ओर होनेलगी। यह इसलि ए कि येफूल केवल सदंुर और सजीलेह नहं थेबल्कि गरमी के मौसम मलूक लपट मभी येताजा रहतेथे। महक भी जसै ी क तसै ी रहती थी। अब बड़ी बी झोपडी छोड़कर नई कमाई सेबनवाए एक छोटेमकान मरहनेलगी। गड़िुड़िया नेउसे इस नई कमाई के बारेमकि सी सेकुछ कहनेसेपहलेह मना कि या था. इसलि ए वह इस बारेमचपु रहती थी। फूल क मांग बढ़नेसेबड़ी बी नेएक तो फूल के भाव बढ़ा दि ए और दसू रेवह गड़िुड़िया को यादा सेयादा हँसानेक कोशि श करनेलगी ताकि उसके मखु सेयादा सेयादा फूल बरसेऔर यादा सेयादा धन पाकर वह अपनी सार इछाएंपरू करे। उसके मन क बात ताड़कर एक दि न गड़िुड़िया नेउससेकहा-'बड़ी बी। अगर तमु यादा लालच करोगी तो मकभी नहं हंसगंू ी।' बड़ी बी बोल- 'हँसना अपनेबस मनहं होता, बेट! म तरह-तरह क एक सेबढ़कर एक गदुगदुानेवाल कहानि याँसनु ाकर तझु ेहँसाती रहूँगी और तरेेमँहु सेढेर सारे फूल झरतेरहगे। यह अछ बात नहं है। गडिुडिया नेकहा। य नहं? मराजमहल सेभी बड़ा महाबना और काफ धन इसा करके देवलोक के कि सी राजकुमार के साथ तरेा वि वाह रचा पजिुजिया हँसनेलगी। इतना हँसने लगी कि उसक डॉलर हो गई और उनमआसँ ूक तरैनेलगी। हपककर नीचेजमीन पर गि र पड़ी और मोती के एक भी बी हैरान हो गई। तभी आसँ ूक एक इानेमबदल गई। बड़ी बी नेय ह मोती उठाया गड़िुड़िया नेउससे कहा-बड़ी थी। अब तुहारेपास बहुत इन है। यह अनमोल मोती है। इसेबेचनेसेतुहसोनेक सात लाख मोहरे मि लेगी जि नसेतमु अपनेसपन का राजमहल आसानी सेबनवा सकोगी। बदलेमोती टपकतेहअछा तो होने पर तरे आखँ के आसं ओु ंके गड़िुड़िया नेबड़ी बी क इस बात का कोई जवान नहंदि या। वह हंसती रह और फूल झरतेरहे। देखत-ेदेखतेबड़ी बी नगर क सबसेबड़ी चनवती बन गई और गल-गल उसके बारेमचर्चा होने ऋगी। वह भी अब गढ़िुढ़िया को हंसानेके बजाय उसेकलानेक कोशि श करनेलगी। मगर गड़िुड़िया केवल इंसती रह। इबर राजा को उसके गुतबर नेसचिूचित कि या कि बी बी को जानेकहाँसेअचानक बहुत सारा धन एत हुआ है। राजा नेबड़ी बी को दरबार नेबलु ाकर उससेइस बारेमपछू ताछ क। बड़ी बी नेकोई सततंषजनक जवाब नहंदि या। राजा के हुम सेउसेबदं बनाया गया और चेतावनी द गई कि यदि यह सार बातेसब-सच नहंबताएगी तो उसेफाँसी द जाएगी और उसक सार जायदाद जत क जाएगी। बह बी को जब लगा कि मौत उसके सामनेखड़ी हैतो उसनेराजा को बता ह दि या कि उसक एक लड़क हैजो हँसती हैतो मखु सेफूल झारतेहऔर रोती हैतो आखँ सेमोती टपकतेह। उहंढेर सारेऐल और चद-एक मोति य को बेचकर उसने अपनी लगती है। सर सपत्ति हासि ल क है। बगी बी क बात सनु कर राजा खु हुआ। उसनेबोतल को भेजकर गड़िुड़िया को भी दरबार मबलु ाया। योती गड़िुड़िया दरबार महाजि र हुई राजा नेउसेसोनेका हुम दि या। लेकि न गडिुडिया रोई नहंउलटेराजा दरबार फूल सेभर गया। मगर राजा को फूल मकोई दि लचपी नहं थी। उसने फूल को पैसेतीय बाला और गडिुडिया दि ए। यहनेलगी। नहं। सभी तध रह गए। कुध राजा नेबड़ी बी को उक आखँ सेआलूह तूटपकनेलगे, मोती झठू बोलनेके लि ए कोसी पर लटकाए जानेका हुम दि या। कोतवाल राजा के आदेश का पालन करनेजा ह रहा था कि दरू सेअलख नि रंजन का नाद सनु ाई दि या। अचानक एक जोगी कट हुआ और उसनेगड़िुड़िया को गोद मउठा लि या। राजा सि पाहि य को कौटनेलगा-इस कुप जोगीको कि तनेभीतर आनेदि या? राजदरबार मइसका या काम राजा क बात सनु कर जोगी इसने लगा।राजानेपर्वूजर्व ो हँसतेय हो? लगता हैतुहराजदरबार के कायदे-काननू मालमू नहं। कोई 'अरेजो अहकार, नह तरेा यह राजदरबार हैऔर न ह तूकोई राजा है। तूनि रा मर्खू र्खहैऔर इसीलि ए तझु ेमोती फूल सेअधि क यारेह। इतना कहकर जोगी बलनेलगा। महाराज। बड़ी बी नेजोगी सेवि नती क कृपा करके राजा को बताइए कि मेरा कहना झठू नहं था कि रोनेपर इस गडिुडिया क आखँ सेमोती टपकतेहै। अपनेको राजा कहनेवालेाणी जोगीनेराजा सेकहा- 'बढ़िुढ़िया क मृयुका पाप अपनेसि र य लेतेहो? उसनेवह कहा था जो उसेसच मालनू एका। मगर सचाई यह हैकि गजिुजिया के आसँ ूक यह दरू मोती बन जाती हैजो हँसनेपर उसक आखँ मतलै ेइतना कहकर जोगी गड़िुड़िया समेत जानेकहाँबि खरेफूल को बटोरने लगी।

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साभारः अमर मालमोह  - हरि कृण कोल  "कोशुर समाचार" - 2025, जुलाई