राज्यपाल ने क्या गलत कहा

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राज्यपाल ने क्या गलत कहा

 

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने कश्मीरी अलगाववादियों और राजनीतिक गुर्गों की एक निजी टी०वी० चैनल पर इनकी सच्चाई क्या सामने रखी कि सब के सब एक स्वर में राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक के विरूध आग उगलने लगे। जैसे ही राज्यपल ने कहा कि कश्मीर के लोगों को भारत विरोधी बनाने में यहां के अवसरवादी, लालची और भ्रष्ट राजनेता भी उतने ही जिम्मेवार है जितना कि पाकिस्तान का वित्तपोषित आतंकवादी और अलगाववादी तंत्र है, तो कश्मीर के यह दोमुंहे सांप हर टी०वी० चैनल पर राज्यपाल के अस्तित्व उसके पद और उसके औचित्य पर ही प्रश्न उठाने लगे। पहली बार किसी राज्यपाल ने इन धूर्त और मक्कारों को इनकी मक्कारी का पर्दाफाश करते कश्मीरी जनता को खुलेआम यह अहसास दिलाया कि भारत सरकार कश्मीर के लोगों के साथ खड़ी रहेगी और उन लोगों के साथ नहीं रहेगी जिन्होंने कश्मीरी लोगों को धर्म और क्षेत्रीयता के आधार पर अपने तुच्छ निजी हितों के लिए कभी आज़ादी तो कभी जन्नत के झूठे सपने बेचकर पत्थरबाज और आतंकवादी बनाया।

गवर्नर ने बहुत स्पष्ट शब्दों में इस सच को सामने लाया कि जम्मू-कश्मीर भारत देश का सबसे भ्रष्ट राज्य है। और स्थानों पर अगर 2 से 3 प्रतिशत कमीशन रिश्वत के रूप में उगाही जाती है तो वहीं कश्मीर में सरकारी और राजनीतिक टोला 25 से 30 प्रतिशत की दर से रिश्वत का बाजार गर्म रखे हुए हैं। इन हालात में यहां का रिश्वतखोर तंत्र लोगों को गुमराह करने के लिए और उनका ध्यान अपने कुकर्मों से हटाने के लिए फसाद के एक निरंतर कुचक्र को जीवित रखे हुए हैं जिसमें अपने बयानों से यहां का राजनेता आग में घी डालने का काम तथाकथित मुख्यधारा के करता है।

होना तो यह चाहिए कि जब भी कोई सरकारी मुलाजिम या राजनेता कार्यरत या कार्यनिवरत कोई भी ऐसा बयान दे जो भारत की अखण्डता अक्षुण्ता और राष्ट्रीयता के विरुद्ध हो तो उसकी सारी सरकारी सुविधायें तत्काल समाप्त हो जानी चाहिए। फिर चाहे वो उसका वेतन हो या पेंशन ये छूटते ही बन्द करने चाहिए। हैरत है कि ये लोग जो कई बार राज्य की विधानसभा और देश की संसद के लिए चुने गये सांसद और मंत्री रहे, किस बेशर्मी से कश्मीर को भारत पाकिस्तान और कश्मीरियों के बीच में झगड़े का विषय स्वीकार करते हैं। भारतीय सुरक्षा बल और कश्मीरी पुलिस की आतंकियों द्वारा की गई निमर्म और जघन्य हत्याओं पर व सुरक्षाकर्मियों पर आतक सर्मथक गुटों द्वारा पथराव की घटनाओं पर कभी जुबान तक नहीं खोलते वहीं आतंकियों के मरने पर सोग मनाने और मर्सिया गाते हुए भारत सरकार को फरमान जारी करते हैं कि भारत कश्मीर मसले पर पाकिस्तान से बात करे। इन लोगों की जुबान से एक बार भी सुनने में नहीं आया कि पाकिस्तान कश्मीर में आतंक का खेल खत्म करें। अपने कश्मीरी नवजवानों को कभी इस बात का अहसास नहीं दिलाया कि वे पाकिस्तान के के मुफ्त पियादे न बनें, आतंकी न बनें। इनके बच्चे जब तक सुरक्षित हैं और जब तक इस फसाद से इनको लाभ

मिलता रहेगा. ये कभी सुधरने वाले नहीं। श्री मदनलाल खुराना के अकस्मात निधन से समस्त देश, विशेषकर कश्मीरी पंडित समाज अत्यन्त स्तब्ध है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।

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साभार:- महाराज शाह एंव कॉशुर समाचार 2018, नवम्बर