


एक देश एक पहचान
यूनिकोड पहचानपत्र कार्ड, जिसे हम आधार कार्ड के नाम से जानते हैं. आज क्यों कुछ लोगों की गले की फास बन गया है और वे सब इससे क्योंकर छुटकारा चाहते हैं। सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला पहचान पत्र है। इसमें 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या छपी होती है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (मा. विपप्रा) जारी करता है। (1) यह संख्या भारत में कही भी व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण होगा। भारतीय डाक द्वारा प्राप्त और यूआई.बी.ए.आई की वेबसाइट से डाउनलोड किया गया ई-आधार दोनों ही समान रूप से मान्य है। कोई भी व्यक्ति आधार के लिए नामांकन करवा सकता है बशर्ते वह भारत का निवासी हो और यू.आई.डी. ए. आई द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करता हो.. चाहे उसकी उम्र और लिंग (जेण्डर) कुछ भी हो। प्रत्येक व्यक्ति केवल एक बार नामांकन करवा सकता है। नामाकन निशुल्क है। आधार कार्ड एक पहचान पत्र मात्र है तथा यह नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है।
आधार दुनिया की सबसे बड़ी बॉयोमीट्रिक आईडी प्रणाली है। विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री पॉल रोमर ने आधार को दुनिया में सबसे परिष्कृत आईडी कार्यक्रम के रूप में वर्णित किया। निवास का सबूत माना जाता है और नागरिकता का सबूत नहीं है आधार स्वयं भारत में निवास के लिए कोई अधिकार नहीं देता है। जून 2017 में गृह मन्त्रालय ने स्पष्ट किया कि आधार नेपाल और भूटान यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए वैध पहचान दस्तावेज नहीं है। तुलना के बावजूद भारत की आधार परियोजना संयुक्त राज्य अमेरिका के सोशल सिक्योरिटी नंबर की तरह कुछ नहीं है क्योंकि इसमें अधिक उपयोग और कन सुरक्षा है। (2) यूआईडीएआई की शुरुआत जनवरी 2009 में भारत सरकार द्वारा भारत के राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से योजना आयोग के तहत एक सलग्न कार्यालय के रूप में की गई थी। अधिसूचना के अनुसार यूआईडीएआई को यूआईडी योजना को लागू करने और संचालित करने यूनिकोड यहां आधार कार्ड भारत के लिए यूआईडी योजना को लागू करने के लिए योजनाओं और नीतियों को निर्धारित करने की जिम्मेदारी दी गई थी. और इसके जिम्मेदार होना था।
यूआईडीएआई डाटा सेंटर औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) मानेसर में स्थित है जिसका उद्घाटन हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 7 जनवरी 2013 को किया था। बेंगलुरु और मानेसर में आधार डेटा लगभग 7.000 सर्वरों में रखा जाता है। विकी आज अचानक क्यों कुछ लोगों को इस से ऐतराज होने लगा है? क्यों सरकारी फ्लेगशिप योजनाओं के लिये इसे आवश्यक नहीं समझने पर जोर दिया जाता है। जब से सरकार ने बेनामी सम्पत्ति के विरुध कदम उठाना आरम्भ किया है मीलाड़ों को देश में कुकरमुत्तों की तरह फैली हुई एनजीओ संस्थानों को बिचौलियों को दलालों को घूसखोरों को क्यों अपनी निजता खतरे में पड़ी लगने लगी है। क्या सोशल मीडिया पर विदेशी हवाई अड्डों पर अथवा व अन्य ऐसे स्थलों पर जहा इन लोगों के कपड़े तक उतार कर नंगा करके तलाशी ली जाती है. इनकी निजता सुरक्षित रहती है। वास्तव में आधार के कारण लाखों फर्जीवाड़े हजारों करोड़ रुपये के सरकार ने पकड़े जो गरीब जनता के हिस्से का पैसा अपने खाते में जमा कराते थे। इसमें नेता बाबू दलालों का गिरोह सलग्न मिले।
आधार की जानकरी लीक होने का भय केवल और केवल उन लोगों को हैं जो गुप्त रूप से काले धंधों में काफी समय से लिप्त हैं। देश की गरीब जनता को इससे वास्तविक लाभ हुआ है।
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साभार:- महाराज शाह एंव कॉशुर समाचार 2018, अक्तूबर