


सामुदायिक मेडीकल इन्शोरेन्स
आन्तरिक रूप से विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय भीषण दौर से गुजर रहा है। 28 साल की निरन्तर अनिश्चतता और अन्यमनसकता के कारण मनोवैज्ञानिक स्तर पर असुरक्षा और गम्भीर अवहेलना झेलता यह समुदाय सामूहिक रूप से एक निराशजनक स्थिति से दो चार है। इस समुदाय का आत्मबल आज बहुत नीचे तक गिर गया है। जबकि सामाजिक और राजनीतिक दायरों में इस भ्रांति को बढ़ चढ़कर प्रचारित किया जाता है कि कश्मीरी पंडित एक अभिजात्य समाज है और इनके पास बहुत विपुल साधन सम्पन्नता सामाजिक पैठ और राजनीतिक पहुच है। इस प्रकार का भ्रम एक ऐसे वर्ग विशेष की हमारे समाज को देन है जो वास्तविक सामाजिक भूमि से कोसों दूर रहकर कश्मीरी हिन्दू समाज के प्रतिनिधत्व का दम भरता है।
हकीकत यह है कि अधिकांश समाज के पारंपरिक आर्थिक आधार के स्रोत पूरी तरह सूख होती हैं। चुके हैं। जीवनभर की जमापूजी अपने आपको नया स्थायित्व और बच्चों के लालन पालन देखभाल और उनके शादी व्याह इत्यादि में खर्च हो चुका है। बच्चे स्वयं को स्थापित करने में जूझ रहे हैं और महानगरों की रेलमपेल में बुरी तरह फंस गये हैं। अच्छी कही जाने वाली प्राइवेट नौकरियों को छोड़ प्रधनमंत्री रोजगार योजना के लिस्ट में अपने भविष्य की सार्थकता तलाश रहे हैं। कुल मिलाकर आसमान से गिरकर खजूर के पेड़ पर लटकने का सपना संजो रहें हैं।
इस सब के बीच ऐसी बीमारिया जिनके इलाज में रही सही मट्टी पलीद होती है. ये बीमारिया, व्यक्ति को न केवल समस्त जमापूजी से वंचित करती हैं अपितु घरबार बिकने तक की नौबत आती है। यह सब इस कारण होता है कि अप्रत्याशित अकारण समस्यायें हमारे समाज को 28 वर्षों से घेरे हैं जिन पर किसी का ध्यान सहज ही नहीं जाता।
ऐसे में हमारे समाज को एक संयुक्त सामूहिक मेडिकल बीमे की आवश्यकता है। इस बीमे की प्रतिपूर्ति हेतु सरकार को आगे आकर समस्त विस्थापितों की मानवताधार पर एक पालसी कवर देना चाहिए जिसके तहत किसी भी सरकारी / गैरसरकारी अस्पताल में कैशलेस इलाज सम्भव हो। ऐसी पालसी में किसी भी प्रकार की पालसी पूर्व की बीमारियां भी कवर होती है ।
कई भाजपा शासित प्रदेशों में स्वास्थ सबन्धी ऐसी स्कीमें पहले से चलाई जा रही हैं। राजस्थान में बामाशाह के अन्तरगत यह स्कीम बहुत ही कामयाब है। जम्मू-कश्मीर व केन्द्र सरकार को इस तरह की स्कीम तुरन्त लागू करनी चाहिए।
अस्वीकरण :-
उपरोक्त लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं और kashmiribhatta.in उपरोक्त लेख में व्यक्त विचारों के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं है। लेख इसके संबंधित स्वामी या स्वामियों का है और यह साइट इस पर किसी अधिकार का दावा नहीं करती है।कॉपीराइट अधिनियम 1976 की धारा 107 के तहत कॉपीराइट अस्वीकरणए आलोचनाए टिप्पणीए समाचार रिपोर्टिंग, शिक्षण, छात्रवृत्ति, शिक्षा और अनुसंधान जैसे उद्देश्यों के लिए "उचित उपयोग" किया जा सकता है। उचित उपयोग कॉपीराइट क़ानून द्वारा अनुमत उपयोग है जो अन्यथा उल्लंघनकारी हो सकता है।
साभार:- महाराज शाह एंव कॉशुर समाचार 2018, जनवरी