मैंने इतनी नाकामयाबियों का सामना किया है इसीलिए जीवन में थोड़ी सफलता प्राप्त कर पाया हूं।
जिसके जीवने से बहुत से लोग जीवित हैं वही इस संसार में जीता हुआ रहता है।
सरिता के सतत गतिशील प्रवाह को नियंत्रित रखने के लिए दो किनारे आवश्यक होते हैं। इसी प्रकार जीवन को नियंत्रित और मर्यादित रखने के लिए व्रतों और नियमों की आवश्यकता होती है।
मैं ही आग हूं, मैं ही कूड़ा-करकट, मेरी आग मेरे कूड़े को जलाकर भस्म कर दे तो मैं अच्छा जीवन पाऊंगा।