
रगन दग तेज्य
रगन दग वछ दिलस दबराय तेज़य । खलुक जज़बॉत्य गॅयि हहॅराय तेज़य ।।
शोदिस इन्सान मॅरिस शेतान फॅरिस चाव । रतस रयय लॅज बेयि सुसराय तेज़य ।।
हुमिस प्वलरिस तु अकनन्दनस कॅडिख तान । ज़बान दम फुट्य, वुट् फिसराय ते य ।।
गौमुत चखि रहमतुक बारान बनि क्याह । जंगल दद्य यसल कुछ टिसराय तेय ।।
हवा ओलूद कोर शोरन व्यपासे । ज़हर फॅहल्योव तु बैयि अन्याय तेज़य ।।
यि केछर जुलमुकुय छूट तु छवर छवर। कर पैयि व्यतरुनी अंहराय तेज़य ।।
मॅशिथ गयि नीर्य नगम तु बाल रॅव्यू ताम । व्यदाखन इंज़ फकत गुंगराय तेज़ेय ।।
छि मॅर्य द्यादम्य पशान नखु फॅक्यू तिमन रॉव्यू । छटान तिम बाक अॅश ददराय तेज़य ।।
यपॉर्य वह्य वाय हॉय हयहाय बोज़न । बमय बम फॅट्य बमन गगराय तेज़य ।।
किंही छुनु डंजि गयि प्रथ रंग अंदर खल । यिलाह बांबुरि तु छांबुरि त्राय तेज़य ।।
गॅमृत्य जन यॉम्य "सॉयिल” लुख छि बुथ्य । व्यपुन छुन कुनि तु पनुनी राय तेज़ेय ।।
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साभारः पृथ्वीनाथ कौल 'सायिल' "कोशुर समाचार" - 2025, मई