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ततः परं ब्रह्मपरं बृहन्तं यथानिकायं सर्वभूतेषु गूढम्। विश्वस्य एक परिवेष्टितारमीशं तं ज्ञात्वा अमृता भवन्ति ॥ 7 ॥            You are the Supreme Brahman, infinite, yet hidden in the hearts of all creatures. You pervade everything. They, who know You, are free from the cycle of birth, death and rebirth. (Svetasvatara 3 : 7)            परमात्मा सब प्रकार से सब काल में मुक्त और शुद्ध है। वह अपरिमित और अनन्त होते हुए भी सभी प्राणियों के हृदय में छिपा हुआ है। परमात्मा को जानने वाले व्यक्ति ही जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।

ज़्येठॖ (ज्येष्ठ) ज़ूनॖ पछॖ (शुक्ल पक्ष) च़ोरम (चतुर्थी) बॊम्वार (मंगलवार),श्री सप्तर्षि सम्वत 5096, Today isJyesth Maas Shukla Paksh Chaturthiyaam Mangalvaasra sanayitaam. Kashmiri Pandit Nirvasan Samvat_31 Sapthrishi Samvat _5096
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अनेक गुणों से युक्त अनार बहुत ज़ायकेदार  रसीला सात्विक फल है। अनार के पत्ते, छाल, फल, फूल तथा बीज सबमें ही औषधीय गुण होते हैं। अनार का पेड़ झाड़ीनुमा व इसके फूल फल हल्के आकषक लाल रंग के होते हैं।

Chemical Constitution -  Fruit contains:-

Malvadin, Pentasglycosides , Usoli Acid, Carbohydrates Carotene Nicotinic Acid, Riboflavin, Vite Thiamine, Delphinidin, Dyglycoside Amino Acids, Sitosterol, Betulic Acid Pnicatolin, Granatins A & B.

लाभ  व उपयोगः-

      अनार अतिसार , रक्त   मूँह व मसूड़ों में छाले और घावए बदहजमी, पेचिश, कलेमदजमतल और इसके अलावा अनेक रोगों में लाभकारी है। कहावत भी है एक अनार सौ प्रकार के बीमार।

      बदहज़मी (अजीर्णता) और बावासीर  में अनार का रस पिलाने में लाभ होता है। इसके साथ यह रस कब्ज में भी लाभकारी होता है।

      बुखार में ज़ायका खराब हो जाने पर अनार के दाने और मिश्री अथवा अनार दाने और किशमिश को मुँह में रखकर चूसने से लाभ होता है, अनार के रस में संेधा नमक और शहद मिलाकर पीने से स्वाद की अरूचि (ज़ायका खराब होना तथा जी मिचलाना) का नाश हो जाता है। अनार बहुत अच्छा रक्त शोधक  होता है।

      अतिसार (दस्त) तथा आँतों की गड़बड़ी में फल की छाल को पानी में चार पाँच उबाल देकर छान लें और इस बने क्वाथ को पीने दे। आँतों में मल बंधकर आगे चलता है। फल के दानों को भूनकर उनका रस निकाल कर पीने से अतिसार में बहुत लाभ होता है। नकसीर (रक्त òाव) होने पर फूलों के रस की बूंदे नाक में डालने से रक्तòाव बन्द हो जाता है।

      यदि पाँचवें माह में गर्भ में बच्चा चलने लगे और गर्भपात का अन्देशा हो तब अनार पत्तों का चूर्ण शहद के साथ प्रयोग करने से लाभ होता है। गर्भकाल में जब अजीब सा लगे तथा उल्टी आने की सम्भावना हो तब अनार दानों को नमक (काला या संेधा) मिलाकर चूसें लाभ होगा।

      पेट में होने वाले चपटे कीड़ों में अनार के जड़ की ताज़ी छाल उतार कर (लगभग50 ग्राम) उसमें आधा किलों पानी मिला लें और इसे उबाल कर आधा कर लें और चार बराबर भागों में बाट कर एक-एक घन्टे बाद पीने से कीड़े मर कर बाहर निकल जाते हैं।

(डा॰ आनन्द मोहन गर्ग)

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