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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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Chervahe Ke Seekh चरवाहे की सीख

चरवाहे की सीख
पुराने जमाने की बात है। एक राजा था।वह यूं तो जनता की भलाई में लगा रहता था पर उसकी सबसे बड़ी कमी यह थी कि वह बहुत जल्दी किसी की बातों पर भरोसा कर लेता था, चाहे वह अच्छी बात हो या बुरी। एक बार एक व्यक्ति ने उसके सामने एक चरवाहे की खूब प्रशंसा की। बस फिर क्या था, राजा ने तत्काल चरवाहे, को राज्य काखजांची बनाने की घोषणा कर दी।चरवाहे ने काम तो संभाल लिया पर उसे पता चल गया कि राजा कान का कच्चा है इसलिए   वह बेहद सावधान रहता था। उसे इस बात का अंदेशा रहता था कि कभी भी उसे काम से हटाया जा सकता है।वह हमेशा अपना सामान तैयार रखता था।उसने अपने रहने के लिए एक कोठरी पर्याप्त समझी।वह उसी में रहता और दिन भर ताला बंद रखता।
    चुगलखोरांे ने राजा के कान भरे कि इस ने बहुत दौलत बटोर ली है और अपनी सारी संपत्ति कोठरी में जमाकर रखी है।राजा ने इस बात की जांच कराए बगैर इसे सच मान लिया और चरवाहे कोखजांची के पद से हटा दिया गया। फिर उसने सैनिकोे कहा कि वे उसके कमरे की तलाशी ली गई। कोठरी मे केवल उसके वे कपड़े और जूते मिले, जिन्हें वह घर से लेकर आया था।सिपाहियों ने पूछा कि आखिर उसने ये चीजें क्यांे जमाकर रखी हुई हैं? चरवाहे ने कहा, ‘मैं जानता था कि महाराज कान के कच्चे हैं। ऐसे स्वभाव वाले व्यक्ति के घर किसी का ज्यादा दिनों तक टिकना संभव नहीं, सो मैं जिस हैसियत मे ंआया, उसी मंे घर लौट जाने के लिए हमेशा तैयार रहा।’
      यह बात राजा तक पहुंच गई। राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने चरवाहे को बुलालाने का आदेश दिया लेकिन तब तक चरवाहा जा चुका था।उसने जाते-जाते राजा को एक बड़ी सीख दी थी।राजा ने तय किया कि वह किसी बात को जांच-परख कर ही उस पर विश्वास करेगा।