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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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अहंकार का बीज


एक महर्षि के आश्रम में दो शिष्य पूरे मनोयोग से शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। उन्होने वर्षों कड़ी साधना कि जिससे वह दोनों अपने-अपने विषय के विद्वान बन गए। विद्वान बनने के बाद धीरे-धीरे उनमें अहंकार आने लगा । उसके बाद फिर दोनों एक-दूसरे से ईष्र्या करने लगे। एक दिन उनके गुरु जी  स्नान करके लौटे तो देखा कि दोनो शिष्य आपस में झगड़ रहे थे। गुरु ने झगड़े का कारण पूछा तो एक शिष्य ने कहा, ‘गुरुदेव, मैं इससे श्रेष्ठ और विद्वान हूं और यह मुझसे सफाई जैसे छोटे काम के लिए कह रहा है।’ दूसरे शिष्य का भी यही कहना था कि वह श्रेष्ठ होने के कारण सफाई का काम क्यों करे। इस पर महर्षि बोले, ‘आप दोनो ही ठीक कह रहे हो। तुम दोनों इतने विद्वान और श्रेष्ठ हो गए हो कि सफाई जैसा छोटा काम करना तुम लोगों को शोभा नहीं देता। आज से मैं यह काम करूंगा।’ यह सुनते ही उन शिष्यों का अहंकार चूर-चूर हो गया। उन्होंने बारी-बारी से सफाई करने का काम बांट लिया।