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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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एकाग्रता

एक युवक था। उसने एक दिन किसी धनी व्यक्ति को देखा। वह उसकी शानो-शौकत देखकर प्रभावित हो गया। उसने धनी बनने की ठान ली और धन कमाने में जुट गया। इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हुई। उससे बात कर युवक को बहुत अच्छा लगा। लोग बता रहे थे कि उस विद्वान की प्रसिद्धि दुनिया भर में फैली हुई है। बस फिर क्या था। उस युवक ने विद्वान बनने की ठान ली। वह अध्ययन में लग गया। पर उसका पढ़ने में मन नहीं लगता था। फिर भी वह अपनी ओर से लगा रहा। लेकिन तभी एक दिन उसे एक संगीतज्ञ से मिलने का मौका मिला। उसने युवक को तरह-तरह के वाद्य सुनाए। युवक ने महसूस किया कि यह संगीतज्ञ लोगों में काफी लोकप्रिय हैं। बस युवक ने तत्काल संगीत सीखने का निर्णय किया। वह उसी संगीतज्ञ जैसा बनना चाहता था। बड़ी मुश्किल से उसे एक गुरू मिला। वह संगीत सीखने तो लगा पर पूरी तरह सीख नहीं पाया। अंततः वह हताश हो गया। उसे लगा कि न तो वह धनवान बन सका, न विद्वान, न संगीतज्ञ। उसे अपना जीवन व्यर्थ लगने लगा।
एक दिन उसे एक महात्मा मिले। उसने महात्मा जी से अपनी व्यथा कह सुनाई। उसकी कहानी सुनने के बाद महात्मा जी ने कहा, ‘बेटा यह दुनिया विशाल है। इसमें न जाने कितने तरह के लोग हैं। किसकी-किसकी नकल करोगे तुम। अगर सफल होना चाहते हो तो किसी एक रास्ते को चुनो। सबसे पहले अपने को पहचानो कि तुम क्या कर सकते हो। जो रास्ता चुनो उस पर एकाग्र होकर आगे बढ़ो। सफलता जरूर मिलेगी।

साभारः नवभारत टाईमस