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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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अधिकार और कत्र्तव्य     

आम के बगीचे के बाहर एक युवक बैठा हुआ था। बगीचे के मालिक ने युवक से पूछा, ‘क्या तुम नौकरी करना चाहोगे?’ युवक ने हामी भरी। उसे बगीचे की देखभाल का काम दे दिया गया। वह मुस्तैदी और लगन के साथ अपने काम को अंजाम देने लगा। वह बगीचे में ही एक झोपड़ी में रहता था और समय मिलने पर ईश्वर की उपासना करता था। इसके अलावा वह किसी और चीज में रुचि नहीं लेता था। उसके व्यवहार से मालिक बहुत खुश था। इस तरह बारह साल बीत गए। एक दिन मालिक ने कहा, ‘बढ़िया और मीठे आम तोड़ कर ला।’ युवक गया और कुछ आम तोड़ लाया। पर वे आम खट्टे निकले। मालिक ने नाराज होकर कहा, ‘तुम्हें यहां काम करते हुए इतने वर्ष हो गए पर अभी तक तुम्हें पता नहीं चला कि कौन से आम अच्छे हैं और कौन खराब।’ युवक ने विनम्रतापूर्वक कहा ‘आपने मुझे बगीचे की रखवाली का भार सौंपा है। आपने यह तो नहीं कहा कि फलों को खाकर देखना, सो मैंने इन्हें हाथ तक नहीं लगाया। भला मुझे कैसे पता रहेगा कि कौन से मीठे हैं और कौन से खट्टे। बगीचे की रखवाली करना मेरा कत्र्तव्य है, लेकिन आम खाने का मुझे कोई अधिकार नहीं है।’ 
    यह सुनकर मालिक बेहर प्रभावित हुआ। उसने कहा, ‘तुम एक साधारण इंसान नहीं हो। ऐसा कत्र्तव्यपरायणता का उदाहरण तो मैंने आज तक नहीं देखा। तुम्हारे जैसे कुछ लोगों के कारण ही यह दुनिया बची हुई है। अब तुम्हें यह काम करने की आवश्यकता नहीं है। तुम यहीं आराम से रहो और प्रभु का नाम जपो।’ युवक ने सोचा कि अब लोग उसे असाधारण इंसान समझेंगे और तरह-तरह की शंका का समाधान करने उसके पास आने लगेंगे। वे उसका अत्यधिक सत्कार भी करेंगे जिससे उसकी साधना में दिक्कत होगी और उसका एकांत भी समाप्त हो जाएगा। यह सोचकर वह दूसरे ही दिन वहां से चला गया। यही युवक आगे चलकर महात्मा इब्राहिम के नाम से विख्यात हुआ।