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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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ईमानदारी की कमाई

संत अबू अली शफीक रोजाना कुछ देर मजदूरी करते और उससे अपने भोजन की व्यवस्था करते। एक धनवान व्यक्ति उनके उपदेशों से बहुत प्रभावित था। उसने एक दिन उन्हें मजदूरी करते देखा तो हैरान रह गया। वह शाम को उनकी कुटिया पर पहंुचा। उसने कुछ कपड़े अनाज और खजूर उनके सामने पेश किए और कहा आप जैसे महान फकीर को मेहनत-मजदूरी करके अपना पेट भरना पड़े यह हमारे लिए शर्मनाक है। आपके आशीर्वाद से मेरे पास पर्याप्त धन है। कृपया मेरी सेवा स्वीकार करें।’

      अबू अली ने विनम्रतापूर्वक कहा, बिना परिश्रम किए दूसरे के धन से अपना काम चलाने वाला कभी दिल से सच्ची बात नहीं कह सकता। जिसका दिया अन्न वह खाएगा उसके प्रति पक्षपात की भावना उसे निष्पक्ष नहीं रहने देगी। हराम की कमाई से किया गया भोजन किसी न किसी रूप में पतन का कारण बनता है। इसलिए जब तक मेरे हाथ पैर काम करने लायक हैं मुझे कमाई करके अपना काम चलाने दो।’ ऐसा कहकर उन्होंने उस व्यक्ति की सभी वस्तुएं वापस कर दीं।