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ततः परं ब्रह्मपरं बृहन्तं यथानिकायं सर्वभूतेषु गूढम्। विश्वस्य एक परिवेष्टितारमीशं तं ज्ञात्वा अमृता भवन्ति ॥ 7 ॥            You are the Supreme Brahman, infinite, yet hidden in the hearts of all creatures. You pervade everything. They, who know You, are free from the cycle of birth, death and rebirth. (Svetasvatara 3 : 7)            परमात्मा सब प्रकार से सब काल में मुक्त और शुद्ध है। वह अपरिमित और अनन्त होते हुए भी सभी प्राणियों के हृदय में छिपा हुआ है। परमात्मा को जानने वाले व्यक्ति ही जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाते हैं।

ज़्येठॖ (ज्येष्ठ) ज़ूनॖ पछॖ (शुक्ल पक्ष) च़ोरम (चतुर्थी) बॊम्वार (मंगलवार),श्री सप्तर्षि सम्वत 5096, Today isJyesth Maas Shukla Paksh Chaturthiyaam Mangalvaasra sanayitaam. Kashmiri Pandit Nirvasan Samvat_31 Sapthrishi Samvat _5096
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Kashmiri Pandits have History of over 5000 years

The Kashmiri Pandits (also known as Kashmiri Brahmins)are a Saraswat Brahmin community from the Kashmir Valley,a mountainous region in the Indian state of Jammu and Kashmir. Kashmiri Pandits are the original inhabitants of Kashmir Valley and only remaining Kashmiri Hindu community native to the Kashmir Valley

History of Kashmiri Pandits- How they were saved by Shri Guru Tegh Bahadur Sahib

The foundation of Sikhism was laid by Guru Nanak Dev Ji about 500 years ago. This was the time when people were badly affected by superstitions, rituals, renunciation and hypocrisy. He opposed these & demonstrated their futility by simpler & practical instances from day to day life. His teachings on way of life were (1) NAM JAPNA - Meditation (2) KIRTKARNI-To do one's duty and live truthfully & honestly (3) VAND CHAKNA - To share the fruits of one's labour with others. Read More

सिख पंथ की स्थापना लगभग 540 वर्ष पूर्व, गुरू नानक देव जी द्वारा की गई । उस समय इंसान पूर्ण रूप से कुरीतियों, वहमों व अंधविश्वास से ग्रसित था। गुरू नानक ने इन बातों का विरोध किया व तीन नियमों को जीवन में ढालने पर जोर दिया 1. नाम जपना - ईश्वर का सिमरन करना 2. किरत करनी - जीवन का निर्वाह मेहनत व ईमानदारी से करना 3. वंड छकना - मिल बांट कर खाना । गुरू नानक , हिन्दू व मुस्लिम दोनों के इतने प्रिय थे कि उनके देहान्त के पश्चात , हिन्दुओं ने उनकी याद में समाधी व मुस्लमानों ने मजार बनाई जो आज भी कतारपुर (पाकिस्तान) में एक ही परिसर में बनी हुई है । इस स्थान पर आज भी नमाज पढ़ी जाती है और गुर्बानी कीर्तन होता है। हिंदी में

History of Kashmiri Bhatta
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