#

One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

web page hit counter free

Haj Yattra हज यात्रा

हज यात्रा पूरी करके एक दिन अब्दुल्ला बिन मुबारक कावा में सोए हुए थे। सपने में उन्होंने दो फरिश्तों को आपस में बातें करते देखा। एक न दूसरे से पूछा- इस साल हज के लिए कितने आदमी आए और उनमें से कितनों की दुआ कबूल हुई जवाब में दूसरे फरिश्ते ने कहा यों हज करने को 80 लाख आए थे पर इनमें से दुआ किसी की कबूल नहीं हुई है । इस साल दुआ सिर्फ एक की कबूल हुई है और वह भी ऐसा है जो यहाँ नहीं आया।”

      पहले फरिश्ते को बहुत अचंभा हुआ। उसने पूछा भला वह कौन खुशनसीब है जो यहाँ आया भी नहीं और उसकी हज कबूल हो गई । दूसरे फरिश्ते ने पहले को बताया वह है दमिश्क का मोची अली बिन मूफिक।”उस पाक हस्ती को देखने के लिए अब्दुल्ला बिन मुबारक अगले ही दिन दमिश्क के लिए चल पड़े और वहाँ उन्होंने मोची मूफिक का घर ढूँढ़ निकाला । पूछा- क्या तुम हज को गए थे।

      मूफिक की आँखों में आँसू भर आए और सिर हिलाते हुए कहा- मेरा मुकद्दर ऐसा कहाँ जो हज को जा पाता। जिंदगी भर की मेहनत से 700 दिरम उस यात्रा के लिए जमा किए थे पर एक दिन मैंने देखा कि पड़ोस के गरीब लोग पेट की ज्वाला बुझाने के लिए उन चीजों को खा रहे थे जिन्हें खाया नहीं जा सकता। उनकी बेबसी ने मेरा दिल हिला दिया और हज के लिए जो रकम जमा की थी सो उन मुफलिसों को बाँट दी।”

      दीन दुखियों की सहायता ही सच्ची तीर्थयात्रा है।