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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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Dayaluta दयालुता


महात्मा ईसा अपनी दयालुता के कारण सदा दुखी और पापी कहे जाने वाले अपराधियों से हर समय घिरे रहते थे। यहाँ तक कि जब वे भोजन किया करते थे, तब भी बहुत से पतित लोग उन्हें घेरे रहते थे। एक बार वे बहुत से नीच जाति के और पापी-पतितों के साथ बैठे भोजन कर रहे थे। यह देखकर एक विरोधी ने उनके शिष्य से कहाµ “तेरे गुरु जिसे तुम लोग भगवान का बेटा और पवित्रा आत्मा बतलाते हो, इस प्रकार नीचों और पतितों से प्रेम करता है, उनके साथ बैठा भोजन पा रहा है। फिर भला तुम लोग किस प्रकार आशा कर सकते हो कि हम लोग उसका आदर करें और उनकी बात मानें?”
    महात्मा ईसा ने विरोधी की बात सुन ली और विनम्रतापूर्वक उत्तर दियाµ “भाई वैद्य की आवश्यकता रोगियों को होती है, नीरोगों को नहीं। धर्म की आवश्यकता पापियों को होती है। उनको नहीं, जो पहले से ही अपने को धा£मक समझते हैं। मैं धर्मात्माओं का नहीं, पापियों का हित करना चाहता हूँ। उन्हें मेरी बहुत जरूरत है।“