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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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Kya Uchit hai Kya Anuchet क्या उचित है, क्या अनुचित?

कमल सरोवर के निकट बैठे तथागत शांत मुद्रा में, विभोर से गंधपान कर रहे थे।
तभी एक देवकन्या ने कहाµ “तुम बिना कुछ दिए ही गंध का पान कर रहे हो। तुम गंध चोर हो।“
    तथागत ने देखा और सिर झुका लिया। तभी एक ग्राम्य बालिका आई और निर्दयतापूर्वक कमल पुष्प तोड़ने लगी। तालाब का पानी भी अस्वच्छ कर दिया। देवकन्या अभी भी खड़ी थी। उसे मौन देखकर तथागत ने कहाµ “देवी! मैंने तो केवल गंधपान ही किया था। तब भी तुमने मुझे चोर कहा और यह तो कमल पुष्प तोड़ रही है, सरोवर को अस्वच्छ भी कर रही है। तब भी तुम इससे कुछ नहीं कह रहीं?”
    देवकन्या मुस्कराई। सहज स्मृति में से स्नेहभरा स्वर फूटाµ “यह अबोध है, अज्ञानी है। क्या उचित है, क्या अनुचित? यह वह नहीं जानती। उसके कार्यकलाप सहज संचालित हैं, पर आप ज्ञानी हैं, नीतिमर्मज्ञ हैं, धर्म के ज्ञाता हैं। क्या श्रेय है और क्या प्रेय? यह आप भली प्रकार जानते हैं। आपकी लघु से लघु क्रिया भी औचित्य एवं अनौचित्य की कसौटी पर कसकर ही क्रियान्वित होनी चाहिए।” पुनः तथागत का शीश अवनत हो गया। इस बार शीश ही नहीं, हृदय भी लज्जित हो आया था। उन्होंने अनुभव किया शिक्षित और विचारशील लोग जब तक नैतिक आचरण नहीं करते सामान्य प्रजा तब तक सुधरती नहीं।