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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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Perkerte ke nikat rahna प्रकृति के निकट रहने से स्वास्थ्य में सुधार आता है

हाल ही के एक अध्ययन ने पाया है कि कॅन्क्रीट जंगल में रहने वाले की अपेक्षा हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के निकट रहने  वाला व्यक्ति ज़्यादा स्वस्थ, सामाजिक, उदार और शांत होता है। फ्रैन्सिस कुओ ( प्रोफ़ेसर,  लैण्डस्कैप और मानव स्वास्थ्य)  के अनुसार शहर निवासियों की तुलना में उपनगरों में रहने वाले लोग भरोसेमंद, सहायता के लिये तत्पर  होते हैं और काफी उच्चतर स्तर का जीवन जीते हैं। प्रोफेसर कुओ कहते हैं कि हरियाली हमारे स्वास्थ्य  को अन्य कारको के बावजूद, लाभ  पहुंचाती है और अगर हम हरियाली से वंचित हो जायें तो स्वास्थ्य को गहरा  आघात लगता है।

 

उन्होने आगे कहा कि प्रकृति और हरियाले वातावरण में बेहतर संज्ञान क्रियाशीलता, अधिक आत्म-अनुशासन और आवेग नियंत्रण तथा बेहतर मानसिक स्वास्थ्य संभव होता है। इसके विपरीत, प्रकृति से दूरी ‘अस्थिर-ध्यान-अतिसक्रियिता-विकार दूरी (अटेनशन डेफिसिट हाईपरएक्टिविटी डिसआर्डर)  के लक्षणों की प्रबलता को बढ़ाती है, चिंता के विकारों तथा क्लीनिकल अवसाद की दर को उच्चतर स्तर पर ले जाती है।

 

बचपन के मोटापे और हृदय रोग की उच्चतर दर तथा युवा एवं वरिष्ठ वयस्कों की उच्चतर मृत्यु की दर को परिवेश में हरियाली की कमी के साथ जुड़ा हुआ पाया गया है।

 

“ अध्ययन में प्रकृति से प्रेम न करने वालों को भी शामिल करके तथा आमदनी व अन्य जो कारण प्रकृति और स्वास्थ्य के सम्बन्ध की व्याख्या कर सकते हैं उनको भी ध्यान मेँ रख कर वस्तुगत ढंग से नापतोल करने के बाद भी हमे ये लाभ नज़र आते हैं।“

 

‘द डेली मेल’ ने प्रोफेसर कुओ के ये शब्द उद्धृत किये है, “ आमदनी तथा अन्य अंतरों को नियंत्रित करने के बाद भी, कम हरियाली वाले परिवेशों में हमें आक्रामकता, हिंसा, हिंसक अपराध और संपत्ति-अपराध की उच्चतर दरें मिलतीं हैं।”