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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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प्रकृति के साथ व्यस्त

हम हमेशा से ही मेरी सेवानिवृत्ति के बाद, व्यस्त शहर मुंबई में अपने पैतृक घर की बजाय प्रकृति के बीच बसना चाहते थे। 32 सालों तक एक इन्फैन्ट्री सैनिक के रूप में मुझे देश के लगभग हर कोने में सेवा करने के कुछ बेहद क़ीमती अनुभवों मिले, और सौभाग्य से संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यकाल के दौरान युद्ध से तबाह अंगोला में भी। सबसे ज़्यादा ख़ुशी से भरे और शिक्षाप्रद अनुभव, दूरदराज के क्षेत्रों में नियुक्ति के दौरान और सुंदर दृश्यों का आनंद लेते हुए या सरल, ईमानदार और मेहनती लोगों के साथ बातचीत में मिले थे।

तो जब हाल ही में मैं सेवानिवृत्त हुआ, हमने पुणे में एक शांत इलाके में बसना पसंद किया,  मुंबई से केवल कुछ ही घंटों की ड्राइव। एक व्यस्त, अनुशासित और नियमित जीवन जीने के बाद, इस आरामदायक जीवनशैली से तालमेल बिठाने में कुछ समय लगा। मेरी पत्नी को बागवानी से प्यार था और हम विभिन्न प्रकार के सजावटी और फलों के पेड़-पौधे लगाने में सफल हुए। मैंने पाया कि उन सभी चीज़ों को करने में ख़र्च करने को पर्याप्त समय था जो पहले संभंव नहीं थी।

मुझे यात्रा करने के अलावा, पढ़ने और लिखने में आनंद आता था।

 हम अपने बगीचे की देखभाल करते हैं और जरूरतमंदों के साथ, समय और कभी-कभी अपने संसाधन भी ख़र्च कर सकते है। मुझे एहसास हुआ कि पक्षियों को दाना डालने के साथ-साथ, कुछ आवारा बिल्लियों और कुत्तों को खाना खिलाने में सबसे ज़्यादा ख़ुशी और आनंद मिलता था। हम गौरैयों, मैनाओं, कबूतरों, कोयलों, कौवों जैसे पक्षियों की इतनी सारी क़िस्में और गिलहरियों को देख के हैरान थे जो प्रतिदिन हमारे बगीचे की मुंडेर पर रखी कुछ न कुछ खाने की चीज़ खाने या पानी पीने आते थे। हम इन नन्हे जीवों को मिलजुल के एक ही जगह ख़ुशी ख़ुशी खाते देख के आनंदित होते थे। एक ही व्यवधान था, कभी-कभी बिल्ली की अटपटी मौजूदगी, जो काफ़ी दूर बगीचे के आख़िरी किनारे पर रखे अपने हिस्से के दूध को पीने के बाद भी, छोटी चिड़ियों या गिलहरी को पकड़ने की फिराक़ में जुटी रहती। शुरुआत में, हम उन्हें देखने के लिए ख़ुद को खिड़की तक ही सीमित रखते थे, लेकिन जल्द ही उन्हें बाहर भी हमारी मौजूदगी की आदत हो गयी।

मैं सुबह-सुबह बाहर बरामदे में अपने योग और प्राणायाम अभ्यास करने के लिए लगभग घंटे भर बैठता हूँ। पक्षियों की चहचहाहट वातावरण को और भी सुहाना बना देती है। सभी पक्षी और गिलहरियाँ मुंडेर पर रखी खाने-पीने की चीज़ों को ख़ुशी-ख़ुशी खाने में मग्न हो जाते हैं, कुछ फीट दूर ही फ़र्श पर मेरी भी मौजूदगी से बेख़बर। कभी-कभी, अजब-ग़ज़ब गिलहरियों को छोटे-छोटे निवाले कुतरते हुए देखकर बड़ा मज़ा आता है। ज़रा सी हलचल होते ही वे उछल के पास के पेड़ पर चली जाती, मेरे स्थिर होने तक फिर से वहीं दिखने के लिए।

हम भाग्यशाली थे कि हमने हॉर्नबिल को कुछ दिनों तक अपना भोजन खाते हुए देखा, कौए को छोड़कर बाक़ी सारे पक्षियों को डरते हुए, या ‘भारद्वाज’ पक्षी का साक्षी बनना, कभी-कभी अच्छा शगुन माना जाता है। गर्मी के दिनों की तेज़ रौशनी में किसी काले कौए को दूध चखते या किसी चूहे को चुपके से बाहर आ के ज़मीन पे रखे दूध का मज़ा लेते देखने का नज़ारा कम ही देखने को मिलता है। पक्षियों के लिए रखे छुट पुट भोजन पर कभी कभी बिल्ली हाथ साफ़ करने की कोशिश करती और आवारा कुत्ते दूध का लुत्फ़ लेते।

हम अब फूलों की बहुत सारी किस्मों के अलावा, नियमित रूप से अमरूदों और पपीतों का आनंद लेने में सक्षम हैं। आम के छोटे पेड़ 15 इंच लंबी पत्तियों के साथ लगभग 12 फुट ऊंचे हैं। हम, अब से कुछ वर्षों बाद हापूस आमों को चखने का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। पिछली सर्दियों में, हमारा बेटा कश्मीर से कुछ सेब के पौधे लाया और हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि वे जलवायु के परिवर्तन से तालमेल बिठाते हुए जीवित रहें और कुछ साल बाद उनमें फल लगें।

प्रकृति हमें बहुत कुछ सिखाती है। मासूम पक्षी और पेड़ सह-अस्तित्व का एक अच्छा उदाहरण हैं। जब मेरे दोस्त और रिश्तेदार मुझसे पूछते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद मैंने क्या काम हाथ में लिया हुआ है, या घर पर मैं अपना समय कैसे ख़र्च करता हूँ, उन्हें हैरानी होती है कि मैं ख़ुद को इस तरह की अजीबोग़रीब गतिविधियों में व्यस्त रखता हूँ।