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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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पुण्य की चाह

            एक बार काशी की राजमाता अपने लाव-लश्कर के साथ सोमनाथ मंदिर पहंुचीं। उन्होंने मंदिर में सवा करोड़ सोने की मोहरों का चढ़ावा चढ़ाया, गरीबों को  दान दिया और कई दिन तक भंडारा किया। रानी मां ने सोचा कि उनके जैसा दानी और पुण्यात्मा दूसरा कोई नहीं है। उसी रात उन्होंने स्वप्न में देखा कि भगवान सोमनाथ उनसे कह रहे हैं, ‘हे रानी, तुम अपना अगला जन्म सुधारने के लिए अभी तक जो कुछ कर रही हो, वह पर्याप्त नहीं है। इस मंदिर में एक गरीब महिला दर्शन करने के लिए आई हुई है। उसे पैसों की आवश्यकता है। यदि तुम अपनी धन-दौलत से उसका पुण्य खरीद लोगी तो निश्चित रूप से तुम्हारा अगला जन्म सुधर जाएगा।’ सुबह उठते ही राजमाता ने स्वप्न की बात अपने मंत्राी को बताई। मंत्राी ने उस महिला को खोजने के लिए अपने आदमियों को भेजा। काफी खोजबीन के बाद एक गरीब बुढ़िया मिली। उसे राजमाता के पास लाया गया। राजमाता ने उससे कहा, ‘माई, तुम अपना पुण्य मुझे दे दो तो मैं तुम्हें सोने की मोहरों से लाद दूंगी। तुम जिंदगी भर मौज करोगी।’

            बुढ़िया बोली, ‘मैं धन-दौलत लेकर क्या करूंगी। मैं तो इसी हाल में खुश हूं। मैंने ऐेसा कोई काम किया ही नहीं कि मेरे पास पुण्य हो। यदि होता तो मैं आप के चरणों में अ£पत कर देती।’ राजमाता सोच में पड़ गईं कि भगवान सोमनाथ ने इस बुढ़िया में कौन सा पुण्य देखा कि उसे कीमत देकर लेने के लिए कहा है। राजमाता ने पूछा, ‘आप करती क्या हो माई?’

            बुढ़िया बोली, ‘मेरे पास कुछ नहीं है। मैं सोमनाथ बाबा के दर्शन करने के लिए घर से सैकड़ों कोस पैदल चल कर भीख मंागती हुई पहुंची हूँ। कल उपवास था। आज एक दयालु ने थोड़ा सत्तू दिया। उसके आधे से मैंने भगवान सोमनाथ की पूजा की। बचे हिस्से का आधा एक भिखारी को दिया। जो शेष बच गया उससे मैंने अपनी भूख मिटाई।’

            राजमाता ने समझ लिया कि पुण्य कमाने के लिए धन-दौलत के दिखावे की नहीं बुढ़िया की तरह तपस्विनी बनने की जरूरत है।