#

One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

web page hit counter free

अतीत, वर्तमान और भविष्य

शायद दुनिया के सबसे तेज़ी से आगे बढ़ते देशों में से एक में सबसे तेजी से बढ़ती जगह, चीन के दक्षिण-पश्चिम में, चोंगक्विंग है। चीन में सबसे अधिक आबादी वाला यह शहर (कुछ 30 लाख निवासी), देश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक, थ्री गोर्जेस डैम, के ऊपरी सिरे पर है। शहर सुंदर नहीं है, लेकिन जगह की वास्तविक ऊर्जा और एहसास लिए, दो प्रमुख नदियों, यांग्त्ज़ी और ज्याहलिंग के संगम के ऊपर चट्टानों पर स्थित है। चीन की सबसे प्रभावशाली, जो रोंगटे खड़े करने वाली हों, उनमें से एक है नदी के ऊपर से गुज़रती पांच-मिनट की केबल कार यात्रा, महज़ किसी हल्की चरचराती सी नज़र आती इंजीनियरिंग के साथ, जो आपको नीचे तेज़ी से बहते पानी में गिरने से बचाती है। पूरा शहर नीयोन रोशनी की एक अंतहीन सरणी से रौशन किया जाता है, क्योंकि उसके निवासी देश की आर्थिक तेज़ी को हमेशा ही बनाए रखते हैं।लेकिन चोंगक्विंग हमेशा से इतना समृद्ध नहीं था। 

बस 60 से ऊपर साल पहले, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, चोंगक्विंग, जिसे तब दरअसल चुंगकिंग के नाम से जाना जाता था,  बर्मा के 'कूबड़' से होकर गुज़रते ख़तरनाक वायु मार्ग भारत से जुड़ा था, जो शहर के लिए पूर्वी चीन के जापानी कब्ज़े के खिलाफ़ अपने बचाव में एक आवश्यक जीवन रेखा थी। अब काफ़ी हद तक भुला दिया गया वह इतिहास, आज अपना राष्ट्रीय और वैश्विक रुतबा हासिल करने की व्यापक चीनी जुगत का हिस्सा बन गया है, और चोंगक्विंग, चीन के अतीत, वर्तमान और भविष्य, को जोड़ते प्रश्नों के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक स्थल है।

 

 

1938 से 1945 तक, सात सालों के लिए, चोंगक्विंग, चीन की अस्थायी राजधानी था। जिसकी च्यांग काई शेक के अधीन राष्ट्रवादी (कुओमिनटांग) सरकार, जापानी आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध में बनी। इतिहास का यह पन्ना, 1949 में कम्युनिस्ट जीत के बाद, राष्ट्राध्यक्ष माओ शासित चीन में फ़ौरन मिटा दिया गया। माओ की पार्टी नहीं चाहती थी कि उनका आधिकारिक इतिहास ऐसी कोई दास्ताँ सुनाए जो उनके पुराने दुश्मन च्यांग काई शेक का श्रेय झलकाए, जो अब ताइवान भाग गया था, और जापान के खिलाफ युद्ध की घटनाओं की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा व्याख्या ने, राष्ट्रवादी शासन के निरंतर जारी प्रतिरोध के महत्व को दबा दिया, जिसके बिना मित्र राष्ट्र एशिया में जीत हासिल नहीं कर पाए होते।

 

हालांकि, हाल के वर्षों में, अपने ही इतिहास की ओर चीनी दृष्टिकोण में क्रांतिकारी बदलाव किया गया है। आज चीन के पीपुल्स गणराज्य की 60 वीं वर्षगांठ है, और स्वयं चीन के लोग अपने ही शासन-काल और घटनाओं को देखने का अवसर पाएंगे जो छह दशक पहले उसे सत्ता में लाया था। यह शासन-काल, बेहद बढ़ी हुई साक्षरता दर, कम शिशु मृत्यु दर, और बेशक, आधुनिक इतिहास में बढ़ती अर्थव्यवस्था सहित कम्युनिस्ट पार्टी के शासन के 60 साल के सकारात्मक पक्ष पर ज़ोर देगा। यह बल्कि, मानव अधिकारों के हनन, स्थानीय भ्रष्टाचार, और बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषण, के बारे में कम कहेगा, और ये सब कुछ समकालीन चीन को नुकसान पहुंचा रहा है। मगर एक पहलू जो निश्चित रूप से खंगाला जायेगा, वो है चीन का स्वयं का आधुनिक इतिहास।

 

जनवादी गणराज्य (पीपल्स रिपब्लिक) की स्थापना की 60 वीं वर्षगांठ के समारोहों में से एक प्रमुख तत्व है राष्ट्रवाद, और नई देशभक्ति का एक महत्वपूर्ण पहलू है चीन-जापान युद्ध की पुनर्जीवित स्मृति, कम्युनिस्टों के 'पुराने बैरी’ राष्ट्रवादी द्वारा किए गए योगदान सहित। च्यांग काई शेक को चीन की मुख्य भूमि में एक ऐसी हस्ती माना जाता है, जिसने जापानी विरोध करने के लिए अपनी देशभक्ति का योगदान दिया। और चोंगक्विंग ने इस अवसर का पूरा फ़ायदा उठाया, अपने अतीत के गौरव दिनों को बदलाव के संकेत के रूप में, युद्ध के दौरान चीन की आज़ादी की रक्षा करते हुए। क्योंकि एक विशाल, उद्यमशील महानगर के नए रुतबे का स्वागत है, पर यह पर्याप्त नहीं।

 

आज का आर्थिक विकास समृद्धि और आराम लाता है, लेकिन यह चीनी लोगों तक उन मान्यताओं को लाने में नाकाम रहा है जिन पर वे विश्वास कर सकें। और ऐसी घटनाएं जिन्होंने पिछली पीढ़ी को प्रेरित किया, जैसे कि माओ की सांस्कृतिक क्रांति, आपदाओं के रूप में उजागर हुई हैं। यही कारण है कि चीन में तो कई जगह और लोगों ने कम्युनिस्ट क्रांति के भी पहले, युवा पीढ़ी की कल्पनाओं को सुलगाने हेतु ऐतिहासिक सामग्री के लिए अतीत में झांकना शुरू किया है। उदाहरण के लिए, शंघाई, चीन का सबसे उन्नत महानगर, 1920 के दशक के दिनों के लिए पुरानी यादों से भरा हुआ है, जब यह शहर दुनिया के लिए एशिया का प्रवेश द्वार था। और आज चीन के कई शिक्षित लोगों के लिए, मान्यताओं के बारे में पता करने के लिए जगह है- चीन के परंपरागत दर्शन है: इस साल की सबसे ज़्यादा बिक्री वाली पुस्तकों में से एक थी कन्फ्यूशियस की सोच पर एक प्रारंभिक किताब।

 

लेकिन चोंगक्विंग का अपनी युद्धकालीन भूमिका को गले लगाना, शायद इस बात का सबसे प्रभावशाली उदाहरण है कि किस तरह समकालीन चीनी सामाजिक परिवर्तन अतीत से सीखता है। अगर आप शहर के बीचों-बीच जाएँ, तो आप चमचमाती गगनचुंबी इमारतों का ऐसा खज़ाना देखेंगे, जो 21 वीं सदी के चीनी शहर की छटा की प्रतिष्ठा हो गए हैं। लेकिन जमीन स्तर से सबसे नज़दीक, बस कुछ ही मीटर लंबा एक बहुत छोटा स्मारक है। यह स्मारक जापान के खिलाफ संघर्ष में जीत की आशा व्यक्त करता हुआ एक प्रतीक, युद्ध के दौरान बनाया गया था। इसने माओवादी क्रांति के वर्षों में अपना अस्तित्व बचा के रखा और यह वहाँ आज भी मौजूद है, जो कि चीन के सबसे गतिशील आधुनिक शहरों में से एक के बीच में एक स्पष्ट चेतावनी है कि अतीत, कितने भी समय तक भुला दिया गया हो, अन्धकार से बचाकर वापस लाया जा सकता है और वर्तमान तथा भविष्य में एक बेहतर भूमिका निभा सकता है।