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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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प्रेम आपको पवित्र बनाता है

श्री श्री रवि शंकर नारद भक्ति सूत्र से सोने की डाली आप तक ला रहे हैं।


प्रेम सभी भावनाओं में सबसे उत्कृष्ट भावना है; यह सबसे ताकतवर भी है। आप अपने विचारों, भावनाओं को आसानी से छुपा सकते हैं, लेकिन प्रेम को छिपाना बहुत ही मुश्किल है। जब आप किसी व्यक्ति की आंखों में देखते हैं, आप उसकी भावनाओं का अंदाजा लगा सकते हैं, लेकिन विचारों के साथ ऐसा नहीं होता। अगर कोई आपके खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है, आप उसका अंदाज़ा कतई नहीं लगा सकते।

 
लेकिन प्रेम न तो कभी पूरी तरह से छिपाया जा सकता है और न ही अभिव्यक्त किया जा सकता है। जितना ही आप इसे छिपाने की कोशिश करते हैं, यह उतना ही स्पष्ट होता जाता है। प्रेम अपने आप को कई तरह से व्यक्त करता है। आपको किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है कि आप उससे प्रेम करते हैं; आपकी चाल, आपकी बातें और आपकी नज़रें ये सब आपके प्रेम को व्यक्त कर देंगी। आपकी मौजूदगी भर से आपका प्रेम बरसता है। 

चुंबकीय प्रभाव

जो प्रेम की परिपूर्णता को प्राप्त कर लेता है, उसका गला भर जाता है और उसके सभी कामों में ख़ुशी प्रकट होती है। वह बोलने में असमर्थ होता है क्योंकि प्रेम का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। प्रेम का उसके आस-पास के लोगों पर चुंबकीय प्रभाव होता है। अगर आपने प्रेम की परिपूर्णता को प्राप्त कर लिया है, सभी लोग आपके संगत में रहकर आपकी उपस्थिति में अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगे। जो भी आपके करीब आएगा, वह घर का वातावरण महसूस करेगा, आरामदायक, जैसे कि वह अपनी माँ के पास आया हो।  

 

पवित्रीकरण की शक्ति

आपके प्रेम में वह शक्ति है जो आपके आस-पास की सभी चीजों, वातावरण को शुद्ध कर देती है। नारद ने अपने प्रेम के सूत्र में कहा है कि, 'पंथावरोध रोमांचश्रुभिः परस्परम् लाप्रमाणः पावयन्ति कुलनि पृथ्वीम् चा। 'प्रेम का आंसू परिवारों, परंपराओं, कस्बों और गाँवों को शुद्ध कर देता है; उनके पास संपूर्ण पृथ्वी को शुद्ध करने की शक्ति होती है। ऐसे स्थान जहां किसी प्रेमी ने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर की प्रतीक्षा में व्यतीत कर दिया, वह स्थान तीर्थस्थल के रूप में परिवर्तित हो गया।  

 

विशुद्ध खुशी

'मोदन्ते पितरो नृत्यनि देवताः, सनाथा चेयम भुर्भवन्ति' वह जो प्रेम से भरा हुआ है, जो कृतज्ञता के आंसू बहाता है, उसकी मात्र उपस्थिति भी लोगों को आनंदित कर जाती है, जब आपकी जिंदगी प्रेम से खिल रही होती है, तब प्रेम आपके जीवन में महान आराम ले आता है, अधिक राहत और खुशी। 

 

प्रेम की शक्ति दुनिया को श्रेष्ठ बना देती है। जब आप ध्यान लगाते हैं; या कोई आध्यात्मिक कार्य करते हैं, तब आपके पुण्य का एक हिस्सा आपके पूर्वजों के पास जाता है। यह उधार चुकाने जैसा है, वह सभी अच्छी चीजें जो आपके पास हैं उसे देना या बांटना। सभी धर्म में, जब कोई विदा लेता है या दिवंगत होता है, वह एक यादगार लम्हा होता है।

  

आप दिवंगत आत्मा के लिए प्रार्थना करते हैं; आपकी प्रार्थना, दूसरी दुनिया को छू लेती है। इसलिए जब भी आप ध्यान केंद्रित करते हैं, याद रखें, आप केवल अपने लिए ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे लेकिन आप इस दुनिया ले लिए ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और उस दुनिया के लिए भी जिसे आपने कभी नहीं देखा। 

 

जब ईश्वर के प्रेम से भरा हुआ भक्त कोई कार्य करता है, वह कार्य मूल्यवान होता है, और वह बेहतरीन कार्य होता है। यहां दो प्रकार के लोग होते हैं; एक वे जो मूल्यवान चीजों के मालिक होते हैं और दूसरे वे जो चीजों को मूल्यवान बनाते हैं। पैग़म्बर मोहम्मद बहुत ही साधारण जूता पहनते थे और वह बहुमूल्य हो गया। महात्मा गांधी ने एक साधारण सी लाठी का इस्तेमाल किया लेकिन वह बहुमूल्य बन गई क्योंकि उन्होंने इसका इस्तेमाल किया था।  

 
ठीक वैसे ही, कोई क्या कहता है वह इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना की कौन उसे कह रहा है, उस व्यक्ति का कद, उसकी महत्ता महत्वपूर्ण होती है, जबकि ज्ञानी व्यक्ति की फटकार भी बहुमूल्य होती है, जबकि मूर्ख व्यक्ति द्वारा गुणगान भी व्यर्थ है। शब्द या कार्य तभी महत्वपूर्ण होते हैं जब उसे बोलने वाला या करने वाला महान हो।

  

पवित्र शब्द

एक विद्वान या एक ब्रह्मज्ञानी धर्मग्रंथ लिख सकता है, एक दार्शनिक किताब लिख सकता है, लेकिन इनमें बौद्धिक अभ्यास बहुत ही कम होता है। इसके विपरीत, चैतन्य महाप्रभु की मात्र चार पंक्तियां व्यक्ति के दिल को छू सकती हैं और उसमें बदलाव ला सकती हैं। इसीलिए ईसा मसीह ने कहा है कि, 'मैं धर्मग्रंथों को भरने आया हूं। 'जब आपके अंदर प्रेम की आग सुलगती है, तब जीवन अपने आप ही एक धर्मग्रंथ बन जाता है, एक पवित्र किताब, अपने जीवन को गीता, कुरान और बाइबल बनाएं। इसे पाने की कुंजी है दिव्य प्रेम! वह भक्त बनें जो ईश्वरीय प्रेम से भरा हुआ है, ईश्वर में खो चुका है।