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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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अवसर के रूप में विपरीत परिस्थितियां

जब हम किसी ऐसी भावनात्मक, सामाजिक या वित्तीय परिवर्तन का सामना करते हैं जिस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है, तो हमें पीड़ा और दर्द का अनुभव होता है। पीड़ा शब्द का इशारा उस तकलीफ से होता है जिससे कोई असहाय होकर गुजरता है, जो शायद कुछ समय तक चल सकती है। यह मानसिक पीड़ा की वह स्थिति हो सकती है जिससे हम डरते हैं या जो हमारे जीवन में अनिश्चितता पर सवाल पैदा करती है। हम शायद भाग्य के सामने समर्पण कर देने जैसा महसूस कर सकते हैं।

 

आप किसी प्रियजन की मृत्यु पर, किसी प्रियजन से बिछुड़ने पर, किसी दर्दनाक दुर्घटना पर या किसी पुरानी शारीरिक बीमारी पर दर्द महसूस कर सकते हैं। दुख दूसरों के द्वारा आपको गलत समझा जाने पर या अपने आपको व्यक्त करने में सक्षम नहीं होने पर भी होता है। कोई व्यक्ति जो दर्द में होता है, सोच सकता है कि वह जीवन में पूरी तरह से असफल है, उसके लिए कोई उम्मीद नहीं बची है। हालांकि जो दुख प्रतीत होते हैं उनके साथ यदि बुद्धि और धैर्य से निपटा जाए तो वे एक सुनहरे अवसर में तब्दील हो सकते हैं। 

यह बदलाव लक्ष्य स्थापित करने, मार्गदर्शन तलाशने और सकारात्मक विचारों को पैदा करने के माध्यम से लाया जाता है।

 

 

उन सभी चीजों से निपटने का मतलब, जो दुख का कारण बनते हैं, प्रगति के अपने रास्ते से बाधाओं को दूर करना है। इसको पूरा करने के कई तरीके हैं। इनमें सबसे पहला है अपनी मजबूतियों पर ध्यान केंद्रित करना और अपनी सीमाओं को बेहतर समझना। सकारात्मक लोगों के साथ बातचीत करने से मदद मिलती है। प्राकृतिक माहौल में चलना, अकेले समय बिताना, चुपचाप पढ़ना या संगीत सुनना ऐसी कुछ गतिविधियां हैं जो सकारात्मक सोच पैदा करती हैं क्योंकि ये हमें संपूर्णता से जोड़ती हैं, ये जीवन की परस्पर प्रकृति के प्रति हमारी आंखें खोलती हैं और ब्रह्म की अवधारणा की समझ शुरू होती है।

 

उन लोगों से बचना बेहतर होता है जिनका जीवन के प्रति दृष्टिकोण नकारात्मक होता है क्योंकि वे आपके जोश को ठंडा कर देते हैं जिससे आपकी मुसीबतों में बढ़ोत्तरी होती है। यदि संभव हो तो, नकारात्मक माहौल से भी बचें। प्यार और आशा, विश्वास और आशावाद में पहाड़ों को भी खिसकाने की शक्ति होती है, वे आपके सभी भयों को जीत सकते हैं और दयालु व प्यारा होने के आपके संकल्प को मजबूत बना सकते हैं।

 

दुख से निपटने के लिए एक और रास्ता है, सामुदायिक सेवा में अपने आपको लिप्त कर लेना और साथ ही ज्ञान और बुद्धि प्राप्त करने के लिए कौशल सीखना। ऐसे अच्छे और गुणी लोगों की संगत की तलाश करें जिनसे आप सीख सकते हैं और अपनी चेतना को उन्नत कर सकते हैं। मन को शरीर की ही तरह अच्छे पोषण की जरूरत होती है। मंत्रों का जप करने या प्रार्थना करने से हम सब में से कुछ लोगों के मनोभाव सही हो सकते हैं जिससे प्रतिक्रिया तथा सभी चीजों की परस्पर प्रकृति की बेहतर समझ को बढ़ावा मिलता है।

 

शक्ति से शक्ति आकर्षित होती है। भगवान को सर्वशक्तिमान और मजबूत माना जाता है, यह कहा जाता है कि आप श्रृंखला में सबसे कमजोर कड़ी के रूप में होते हैं लेकिन इसका उलट भी सच हो सकता है - आप श्रृंखला में सबसे मजबूत कड़ी भी हो सकते हैं। क्योंकि आप उतना ही मजबूत बनते हैं जितना मजबूत आप अपने आप को समझते हैं।

 

इन सभी तरीकों को मिलाने से हम में शांति और आशा का भाव पैदा होता है। और आशा की उपस्थिति में, विश्वास पैदा होता है। और विश्वास की उपस्थिति में चमत्कार होता है। सकारात्मक सोच उपचार, क्षमा और दया के लिए विपरीत परिस्थितियों को अवसरों में तब्दील कर सकती है। तो फिर हमारे कर्म भविष्य के किसी डर के बिना स्वतः ही होते रहेंगे। फिर दर्द की राह प्रगति का मार्ग बनेगी और दुख शाश्वत सुख में बदल जाता है।