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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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अहंकार ही बंधन हैं

एक तपस्वी किसी धर्मात्मा राजा के महल में पहुँचे। राजा गद्गद हो गए और पूछा, आज मेरी इच्छा है कि आपको मुँहमाँगा उपहार दूँ। तपस्वी ने कहा, आप ही अपने मन से सबसे अधिक प्रिय वस्तु दे दें, मैं क्या माँगू। राजा ने कहा, अपने राज्य को समर्पण कर दूँ। तपस्वी बोले, वह तो प्रजाजनों का आप तो संरक्षक मात्रा हैं। राजा ने बात मानी और दूसरी बात कही, महल, सवारी आदि तो मेरे हैं, इन्हें ले लें। तपस्वी हँस पड़े, राजन् आप भूल जाते हैं। यह सब भी प्रजाजनों का है। आपको कार्य की सुविधा के लिए दिया गया है।
    अबकी बार राजा ने अपना शरीर दान देने का विचार व्यक्त किया। उसके उत्तर में तपस्वी ने कहा, यह भी आपके बाल-बच्चों का है, इसे कैसे दे पाएँगे। राजा को असमंजस मंे देखकर तपस्वी ने कहा, आप अपने मन का अहंकार दान कर दें। अहंकार ही सबसे बड़ा बंधन है। राजा दूसरे दिन से अनासक्त योगी की तरह रहने लगा। तपस्वी की इच्छा पूर्ण हो गई।