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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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अहंकार से मुक्ति

एक बार बौद्ध दार्शनिक नागार्जुन अपने विचारों का प्रचार करने के उद्देश्य से चीन गए। चीन का सम्राट नागार्जुन के शून्यवाद और अन्य विचारों से बेहद प्रभावित था। वह उनके स्वागत के लिए पहुंचा। उनके उपदेश से वह बेहद प्रभावित हुआ। राजा ने कहा, ‘महात्मन्, मैं अहंकार से बुरी तरह जकड़ा हुआ हूं। इसे दूर करने का उपाय सुझाएं।’ नागार्जुन ने कहा, ‘आधी रात के समय अतिथि गृह में आना पर अकेले नहीं, अहंकार को अवश्य साथ लाना।’
    आधी रात को सम्राट अतिथि गृह पहंुचा। नागार्जुन ने द्वार पर खडे़-खड़े ही पूछा, ‘अकेले आए हो, अहंकार को साथ क्यों नहीं लाए?’ सम्राट ने कहा, ‘साथ लाया हूं, पर वह मेरे हृदय में बैठा हुआ है।’ नागार्जुन ने कहा, ‘एकाग्रचित होकर बैठो और खोजो कि तुम्हारे हृदय के किस कोने में अहंकार है।’ फिर कुछ क्षण वह रुककर बोले, ‘मैं और मेरा की भावना ही अहंकार को जन्म देती है। इस भावना से मुक्त होते ही अहंकार स्वतः गायब हो जाता है। जो अंतिम समय जाता है, सिर्फ वही मेरा है। धन-संपदा, परिवार और मान-प्रतिष्ठा सभी क्षणभंगुर हैं। न कोई बड़ा है न कोई छोटा, यह भावना अपने अंदर पैदा करो। अहंकार अपने आप गायब हो जाएगा।’ नागार्जुन की इन बातों का सम्राट पर गहरा असर पड़ा।