#

One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

web page hit counter free

कल्पनाओं

एक युवक ने स्वप्न में देखा कि वह किसी बड़े राज्य का राजा हो गया है। स्वप्न में मिली इस आकस्मिक विभूति के कारण उसकी प्रसन्नता का ठिकाना न रहा।
    प्रातःकाल पिता ने काम पर चलने को कहा, माँ ने लड़कियाँ काट लाने की आज्ञा दी, धर्मपत्नी ने बाजार से सामान लाने का आग्रह किया, पर युवक ने कोई भी काम न कर एक ही उत्तर दिया “मैं राजा हूँ, मैं कोई काम कैसे कर सकता हूँ!”
    घर वाले बड़े हैरान थे आखिर किया क्या जाए? तब कमान सँभाली उसकी छोटी बहन ने। एक-एक कर उसने सबको बुलाकर चैके में भोजन करा दिया। अकेले खयाली महाराज ही बैठे-के-बैठे रह गए।
    शाम हो गई, भूख से आँतें कुलबुलाने लगीं। आखिर जब रहा नहीं गया तो उसने बहन से कहा “क्यों री! मुझे खाना नहीं देगी क्या?”
    बालिका ने मुँह बनाते हुए कहा “राजाधिराज! रात आने दीजिए, परियाँ आकाश से उतरेंगी, वही आपको उपयुक्त भोजन प्रस्तुत करेंगी। हमारे रूखे-सूखे भोजन से आपको संतोष कहाँ होगा!” 
व्यर्थ की कल्पनाओं में विचरण करने वाले युवक ने हार मानी और मान लिया कि धरती पर रहने वाले मनुष्य को निरर्थक, लौकिक एवं भौतिक कल्पनाओं में ही न डूबे रहना चाहिए, वरन जीवन का जो शाश्वत और सनातन सत्य है, उसे प्राप्त और धारण करने का प्रयत्न भी करना चाहिए। इतना मान लेने पर ही उसे भोजन मिल सका।