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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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आत्मविश्वास


कीर्ति अवस्थी 

हदय में जिन शुभ -अशुभ विचारों , भद्र या अभद्र भवनाओं, उच्च या निकष्ठ कल्पनाओं का प्रवाह चलता रहता है, वही अपत्यक्ष रुप से हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करता रहता है। हमारा एक-एक पिचार, आधारशिलाएं है, जो ‘मन’ को बनाती हैं, सोचने-विचारने, निर्णय लेने की ‘शक्ति’ को बनाती है। मनोविज्ञान का यह सिद्धांत है कि चिन्तन से उसी भाव या गुण की वृद्धि होता है, जिसके विषय में हम निरन्तर सोचते विचारते रहते है। सोचते विचारते रहते हैं। कुछ लोगों के मन में ऐसा विश्वास जम जाता है के अमुक दोष, अमुक त्राुटि, अमुक न्यूवता मेरे पूर्वजों ो मुझमें आ गई है, इसलिये मैं विवश हूं। यह गलत विचारधारा मन से निकाल दें। अपने चिन्तन द्वारा उसे सोचें, गहराई तक जाएं , तब निष्कर्ष निकालें। एक बार किसी राजा से एक व्यक्ति ने कहा, ‘आपके राज्य में अमक व्यक्ति ऐसा है, जिसका मुख देखने से दिन भर खाना नहीं मिलता।’ राजा ने कहा, ‘यदि ऐसा है तो कल सुबह मैं उस व्यक्ति का मुख देखूंगा, देखंु मुझे भोजन मिलता है या नहीं? ’ सेयोग से राजा उस दिन भोजन नहीे कर पाए, उन्होने सोचा सचमुच यह व्यक्ति मन्दभाग्य है, राज्य में इसे रहने नहीं देना चाहिए। अतः राजा ने उस व्यक्ति से कहा, ‘तुम अभागे हो, हमने तुम्हारा मुंह देखा, हमें दिन भर भेजन नहीं मिला । यदि तुम राज्य में रहोगे तो तुम्हें देखने की सजा, बहुत से लोगों को भुगतनी पड़ेगी, अतः तुम्हें फंासी की सजा देते हैं।’ यह सुन कर वह व्यक्ति स्तब्ध रह गया, पर वह अपने को हीन, अभागा मानने को तैयार न था, उसने धैर्य से जवाब दिया, ‘सजन क्षमा करें, मैं तुच्छ नहीे हुं। नही मैं अपने को अभागा मानता हूं, यह दुर्भावना आप मन से निकाल दें । मेरा मुख देखने से आपको भोजन नहीे मिला, यह आरोप भी मिथ्या है। क्षमा करें महाराज, मुझे तो आपको देखकर फांसी की सजा मिल गई। मेरी अपेक्षा तो आप तुच्छ अभागे प्रतीत होते हैं। ’ राजा ने उसकी बातों पर विचार किया , उन्हें आत्मबोध हुआ ,किसी को तुच्छ नहीे समझना चाहिए। उस व्यक्ति ने अपने धैर्य व विश्वास के बल पर राजा को यह अहसास करा दिया, यह उस व्यक्ति का आत्मविश्वास ही था, जो विपति से बचा लाया। अतः अपने पर विश्वास रखें आत्मबल ही निर्माण की महाशक्ति है। आत्मश्रद्धा ह ी वह आधार है जो आप को ऊंचाइयो