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One shrine to the next, the hermit can't stop for breath. Soul, get this! You should have looked in the mirror. Going on a pilgrimage is like falling in love with the greenness of faraway grass.     Lala Ded

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आदमी की कीमत

इतिहास में तैमूरलंग का नाम अत्याचारी और अन्यायी शासक के रूप में प्रसिद्ध है। उसे गलत न्याय करने लोगों को दण्ड देने और उन्हें तड़पाने में एक अनोखा आनन्द मिलता था।

      तैमूरलंग का विचार था कि अपराधी को सिर्फ कड़े दण्ड से ही सुधारा जा सकता है। उसका यह विचार गलत था क्योंकि अच्छाई या बुराई मनुष्य में स्वयं जन्म लेती हैं और मनुष्य स्वयं ही बनता या बिगड़ता है।

      उस दिन सोमवार था। शाम का अँधेरा धीरे-धीरे गहरा होता जा रहा था हमेशा की तरह उस दिन भी तैमूरलंग के सामने तमाम कैदी लाए गए। कैदियों में एक कवि अहमदी भी था। तैमूरलंग ने सभी कैदियों को मुस्करा कर देखा और कहा- कहिये अहमदी साहब आप यहाँ कैसे

आपके सिपाहियों द्वारा पकड़ कर लाया गया हूँ।“ अहमदी ने कहा।

आखिर किसलिए तैमूरलंग ने पूछा।

आप जानते तो हैं।“ अहमदी बोला।  

हाँ याद आया। तुमने जनता को भड़काने वाली कविताएँ लिखी हैं तैमूरलंग बोला।

जी नहीं मैंने जनता को भड़काने के लिए कविताएँ नहीं लिखीं बल्कि मैं तो लोगों को सच्चाई बताने के लिए कविताएँ लिखता हूँ।“

अच्छा अब हमारी समझ में आया।“ तैमूरलंग ने व्यंग्य से कहा- सुना है कि कवि लोग बड़े पारखी होते हैं किसी भी चीज की कीमत बहुत जल्दी लगा लेते हैं।“

आपने ठीक ही सुना है।“ अहमदी ने कहा।

अगर तुम आदमी की कीमत लगा दोगे। तो तुम्हें आजाद कर दिया जाएगा और अगर न लगा सके तो तुम्हें इसी समय फांसी दे दी जाएगी। बोलो किसी आदमी की कीमत क्या होती है तैमूरलंग ने पूछा।

हुजूर माफ करे हर आदमी की कीमत अलग-अलग होती है।“ अहमदी मुस्कराते हुए बोला।

तुमसे जो कुछ पूछा जाए बस उसी का जवाब दो। ज्यादा या कम नहीं समझे।“ तैमूरलंग गरज उठा और उसने एक जल्लाद को संकेत किया। वह एक बूढ़े कैदी को तैमूरलंग के सामने पकड़ लाया।

तैमूरलंग ने अहमदी से बेधड़क पूछा- “इस आदमी की कीमत क्या है

अहमदी बोला- पाँच करोड़ सोने की अश£फयाँ।“

तैमूरलंग ने आश्चर्य से कहा इस कैदी की कीमत इतनी ज्यादा जी हाँ! अहमदी ने सिर हिलाया। और मेरी कीमत

आपकी कीमत ज्यादा से ज्यादा पाँच सोने की अश£फयाँ।“ अहमदी ने बड़ी गम्भीरता से उत्तर दिया।

खामोश! तैमूरलंग गरज उठा तुम्हारी यह मजाल?“ अहमदी चुप रहा। अहमदी को चुप देख कर तैमरलंग का खून खौल उठा। वह बोला- तुमने मेरी जो कीमत बतायी है, उससे ज्यादा कीमत तो मेरी पोशाक की ही है।“

मैंने पोशाक की कीमत बतायी है।“ अहमदी बोला।

मैंने तुमसे पोशाक की कीमत नहीं पूछी है।“ तैमूरलंग चिल्ला उठा।

आपकी कीमत अहमदी बोला मेरी नज़र में कुछ भी नहीं है। जिस आदमी के मन में दया न्याय सत्व व धर्म का थोड़ा-सा भी अंश नहीं हो उसकी कीमत कुछ भी नहीं होती।

      कवि अहमदी की बातें सुन कर तैमूरलंग निरुत्तर हो गया। अहमदी की बातों का उसके पास कोई जवाब नहीं था। कुछ देर तक सोच-विचार करने के बाद तैमूरलंग ने अपने जल्लादों को संकेत किया और कवि अहमदी सहित सभी कैदियों को कैद से मुक्त कर दिया।